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बाबा रामदेव का बड़ा बयान: मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं

दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रोत्कर्ष दिवस पर बाबा रामदेव ने मुसलमानों को डरने की आवश्यकता नहीं होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म भले ही भिन्न हो, लेकिन पूर्वज एक ही हैं। रामदेव ने 'हिंदू राष्ट्र' के विचार को लेकर फैले भ्रम को दूर किया और प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें इस भव्य समारोह में उनके विचार और सामाजिक सद्भाव पर उनके दृष्टिकोण।
 

राष्ट्रोत्कर्ष दिवस का भव्य आयोजन


दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज का 84वां प्राकट्य महोत्सव 'राष्ट्रोत्कर्ष दिवस' धूमधाम से मनाया गया। इस समारोह में योग गुरु बाबा रामदेव, कुलपति प्रो. योगेश सिंह और कई संत-महात्मा शामिल हुए। बाबा रामदेव ने इस मंच से सामाजिक सद्भाव और अल्पसंख्यकों के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।


मुसलमानों को डरने की आवश्यकता नहीं

बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि देश के किसी भी मुसलमान को डरने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, 'हमारे धर्म और पूजा के तरीके भले ही भिन्न हों, लेकिन हमारे पूर्वज एक ही हैं।' उन्होंने मुसलमानों से अपने पूर्वजों और ऋषि-मुनियों की परंपरा को अपनाने का आग्रह किया। रामदेव ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति दाढ़ी रखे या अपने तरीके से कपड़े पहने, लेकिन उसे अपने चरित्र और जड़ों को अपने सनातनी पूर्वजों के समान बनाए रखना चाहिए।


हिंदू राष्ट्र का विचार और उसके प्रभाव

बाबा रामदेव ने 'हिंदू राष्ट्र' के विचार पर फैले भ्रम को दूर करते हुए कहा कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने से किसी भी समुदाय के नागरिक को कोई खतरा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि कुछ तत्व मुसलमानों को यह कहकर डराते हैं कि हिंदू राष्ट्र बनने पर वे कहां जाएंगे, जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है। उन्होंने प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि हर घर को संस्कारों का गुरुकुल बनाना चाहिए।


सामाजिक बदलाव का संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर, बाबा रामदेव ने देश की सांस्कृतिक और धार्मिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक व्यावहारिक योजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि भारत में 5 लाख से अधिक मंदिर हैं। यदि राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख मंदिर आगे आएं, तो देश में हजारों गुरुकुल और गौशालाएं आसानी से स्थापित की जा सकती हैं। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया।