बाबा रामदेव का युवाओं और शिक्षा पर बड़ा बयान: क्या बदलाव की जरूरत है?
नई दिल्ली में बाबा रामदेव का बयान
नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के युवाओं, राजनीतिक परिदृश्य और शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने युवाओं के सकारात्मक प्रयासों की सराहना की, लेकिन नशे और हिंसा जैसी समस्याओं पर भी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही, उन्होंने स्कूलों की दयनीय स्थिति और परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की संभावना भी जताई।
युवाओं की सकारात्मकता और चुनौतियाँ
"Gen-Z बेहतर काम कर रहे हैं"
बाबा रामदेव ने कहा कि Gen-Z को एक ही दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है। उनके अनुसार, देश के कई युवा उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और नई उपलब्धियों को हासिल कर रहे हैं, जबकि कुछ युवा नकारात्मक गतिविधियों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं।
Haridwar, Uttarakhand: Yoga guru Baba Ramdev says, "In every field, good things are happening. There are many children and youth, and some Gen Z are doing good things. Some people are also creating a ruckus and doing wrong things. Some boys and girls have five or ten girlfriends… pic.twitter.com/6QJS64EoJ2
— IANS (@ians_india) August 15, 2026
राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी
राजनीतिक माहौल पर साधा निशाना
राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करते हुए, रामदेव ने उन लोगों की आलोचना की जो देश की व्यवस्था के बारे में नकारात्मक बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का एक हिस्सा है, लेकिन इसे व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने नेताओं से जाति, वर्ग और समुदाय के आधार पर विभाजन से बचने की अपील की।
बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि राजनीति में हर किसी को अपनी बारी का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने उन नेताओं पर कटाक्ष किया जो लगातार सत्ता में आने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि जनता किसी को नेतृत्व का अवसर देती है, तो इसके लिए धैर्य रखना आवश्यक है।
शिक्षा प्रणाली पर चिंता
शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता
बाबा रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे स्कूलों की स्थिति का उल्लेख किया, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उनके अनुसार, कई स्कूलों में शिक्षक, किताबें, बिजली, पानी और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बच्चों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता
पेपर लीक मामले को लेकर भी उठे सवाल
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। बाबा रामदेव ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वह इसके खिलाफ आंदोलन करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं पर बढ़ती निर्भरता छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने भर्ती में पक्षपात के आरोप भी लगाए। अब यह देखना होगा कि बाबा रामदेव द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए क्या कदम उठाती है।