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बारामती उपचुनाव: सुनेत्रा पवार का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय

बारामती की सीट पर सुनेत्रा पवार का निर्विरोध निर्वाचन लगभग सुनिश्चित हो गया है, क्योंकि कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी को वापस ले लिया है। यह निर्णय अजित पवार के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में लिया गया है। इस कदम ने 23 अप्रैल को होने वाले मतदान की औपचारिकता को निरर्थक बना दिया है। पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को बनाए रखने के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। जानें इस सियासी घटनाक्रम के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

बारामती सीट पर पवार परिवार का दबदबा


बारामती की सीट महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का अभेद्य गढ़ मानी जाती है। हाल ही में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अचानक अपने उम्मीदवार को वापस ले लिया, जिससे सुनेत्रा पवार का निर्विरोध निर्वाचन लगभग सुनिश्चित हो गया है। यह निर्णय अजित पवार के प्रति 'सम्मान' के प्रतीक के रूप में लिया गया, जिनकी इस वर्ष जनवरी में बारामती में विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। कांग्रेस के इस कदम ने 23 अप्रैल को होने वाले मतदान की औपचारिकता को निरर्थक बना दिया है। गुरुवार को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि थी, और इससे पहले कई राजनीतिक दबाव उत्पन्न हो रहे थे।


पवार परिवार की राजनीतिक विरासत

जब जनवरी में अजित पवार का विमान बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, तब वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और बारामती से विधायक थे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन विधानसभा सीट खाली रह गई। बारामती सीट पर 1991 से अजित पवार का कब्जा था, और इससे पहले उनके चाचा शरद पवार यहां से चुनाव जीतते थे। कांग्रेस ने पहले अमर मोरे को मैदान में उतारा था और पार्टी प्रमुख ने इसे 'वैचारिक लड़ाई' बताया था, लेकिन एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं के दबाव और पर्दे के पीछे की बातचीत ने कांग्रेस का रुख बदल दिया।


कांग्रेस का अंतिम समय में निर्णय

गुरुवार को महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने अजित पवार के प्रति सम्मान के चलते अपना प्रत्याशी वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अजित पवार अतीत में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों में रह चुके हैं। इस निर्णय के पीछे कई कारण थे। एनसीपी के नेताओं ने कांग्रेस से संपर्क किया, और सुनेत्रा पवार ने भी कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात की। इन सबके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने बारामती की लड़ाई से हटने का निर्णय लिया। अब इस सीट पर कोई चुनावी मुकाबला नहीं बचा है, और सुनेत्रा पवार की जीत केवल औपचारिकता बन गई है।


सियासी परिणाम और भविष्य की दिशा

इस निर्णय के बाद बारामती विधानसभा और लोकसभा सीट पर पवार परिवार का नियंत्रण बना रहेगा। यह पवार खेमे के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत है। हालांकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक सौदा मानते हैं, कांग्रेस इसे सम्मान की मिसाल बता रही है। अजित पवार की अचानक मृत्यु ने जो शून्य उत्पन्न किया था, अब उनकी पत्नी उसे भर रही हैं। बारामती की जनता अब केवल औपचारिकता देखने को बची है, क्योंकि चुनावी मैदान में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है और सुनेत्रा पवार अगली विधायक बनने जा रही हैं।