बिहार की राजनीति में बदलाव: राबड़ी देवी और लालू प्रसाद का बंगला खाली कराने का आदेश
नीतीश कुमार की स्थिति और राजनीतिक प्रभाव
नीतीश कुमार की कमजोर स्थिति और मुख्यमंत्री पद से हटने के संभावित परिणाम बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। यह स्थिति भाजपा शासित अन्य राज्यों की तरह विषाक्त हो सकती है। हाल ही में, राबड़ी देवी और लालू प्रसाद का सरकारी बंगला खाली कराने का आदेश दिया गया है। राबड़ी देवी, जो 10, सरकुलर रोड पर निवास करती हैं, को यह बंगला विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में आवंटित किया गया था।
हालांकि, अब उन्हें कहा गया है कि उन्हें बंगला खाली करना होगा, जबकि उन्हें एक समान बंगला दिया जाएगा। यह स्थिति राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत नकारात्मक है। यह ध्यान देने योग्य है कि देश में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का एक ही बंगले में रहना एक अनोखी बात है। फिर भी, सरकार ने उनसे बंगला खाली कराने का निर्णय लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए बंगला आवंटन का विवाद
यह भी ध्यान देने योग्य है कि पहले पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर बंगला देने का नियम था, जिसे अदालत ने समाप्त कर दिया। इसके बावजूद, नीतीश कुमार को 7, सरकुलर रोड का बंगला आवंटित किया गया है। लेकिन अब सरकार ने राबड़ी देवी और लालू प्रसाद से बंगला छीनकर उसे दलित मंत्री नंद किशोर राम को देने का निर्णय लिया है।
भाजपा और सरकार के नेता इसे एक चालाकी भरा कदम मानते हैं, जिससे यादव बनाम रविदास का विवाद उत्पन्न हो सकता है। उनका मानना है कि इससे दलित समुदाय, जो राजद का समर्थन करता है, भाजपा से दूर हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि यादव पहले से अधिक मजबूती से राजद से जुड़े रहेंगे। यदि यादव पार्टी के साथ बने रहते हैं, तो मुसलमान भी राजद को नहीं छोड़ेंगे।