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बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का संशोधन

बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें 7 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। दावे और आपत्तियों के लिए समय सीमा 1 अगस्त से 1 सितंबर तक है। इस प्रक्रिया में कई मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनमें मृत और प्रवासी मतदाता शामिल हैं। जानें इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के बारे में और अधिक जानकारी।
 

बिहार में मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी

बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत चुनाव आयोग ने शुक्रवार को विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया। इस प्रक्रिया में 7 करोड़ 24 लाख से अधिक मतदाताओं ने गणना फॉर्म जमा किए, और इन सभी के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं। मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 1 अगस्त से 1 सितंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद, अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित की जाएगी। ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद विभिन्न जिलों से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आंकड़े भी सामने आए हैं।


पटना में सबसे अधिक 3.95 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं। सुपौल जिले में भी 1.28 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। सुपौल के जिला निर्वाचन पदाधिकारी और जिलाधिकारी सावन कुमार ने बताया कि पहले जिले की पांच विधानसभा सीटों पर कुल 16,40,664 मतदाता थे, जो अब घटकर 15,12,457 रह गए हैं।


एसआईआर प्रक्रिया के तहत भागलपुर जिले की वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में 2 लाख 44 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम कट गए हैं। भागलपुर जिले में कुल मिलाकर 24 लाख 414 वोटर थे।


बिहार में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया


चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में एसआईआर शुरू करने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, प्रवासी और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं के नाम हटाना और सभी योग्य मतदाताओं को शामिल करना था। आयोग के अनुसार, बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ ने गणना फॉर्म जमा किए। हालांकि, इस प्रक्रिया में 52 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें 18 लाख मृत, 26 लाख बिहार से बाहर चले गए और 7 लाख दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता शामिल हैं।