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बिहार में समान नागरिक संहिता पर सहयोगी पार्टियों का विभाजन

बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भाजपा की सहयोगी पार्टियों में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां कुछ पार्टियां इसका समर्थन कर रही हैं, वहीं जनता दल यू, लोजपा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूसीसी को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की बात कही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और पार्टियों का क्या रुख है।
 

समान नागरिक संहिता का समर्थन और विरोध

पटना। भाजपा की कई सहयोगी पार्टियों ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन किया है। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और जीतन राम मांझी की पार्टी ने इस कानून का समर्थन किया है। हालांकि, बिहार में तीन सहयोगी पार्टियों ने इसका विरोध किया है। जनता दल यू, लोजपा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। वहीं, महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार की पार्टी ने इस पर चुप्पी साध रखी है।


बिहार में भाजपा की तीन सहयोगी पार्टियों ने यूसीसी के प्रति अलग रुख अपनाया है। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू ने स्पष्ट किया है कि वह इस कानून को बिहार में लागू नहीं होने देगी। पार्टी के विधायक श्याम रजक ने कहा है कि उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोजपा और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने समर्थन या विरोध की बजाय कहा है कि वे कानून का मसौदा देखने के बाद निर्णय लेंगे।


यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए के शासन वाले सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। वर्तमान में देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास हो चुका है, और अब इन राज्यों में राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना का इंतजार है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने यूसीसी कानून का मसौदा तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं।