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बिहार में सुरक्षा विवाद: राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने लौटाई सुरक्षा

बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद से राजनीतिक हलचल जारी है। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने अपनी सुरक्षा लौटाने का निर्णय लिया है, जिसके बाद राजद कार्यकर्ताओं की भीड़ राबड़ी आवास पर इकट्ठा हो गई। इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक निहितार्थ।
 

राजनीतिक ड्रामा जारी


बिहार में भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। राबड़ी देवी को 10, सरकुलर रोड का बंगला खाली करने का आदेश मिलने के बाद सुरक्षा को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार ने सुरक्षा खतरों का आकलन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की जेड प्लस सुरक्षा को समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा भी घटा दी गई है।


सुरक्षा लौटाने का निर्णय

इस निर्णय से नाराज होकर राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने अपनी सुरक्षा लौटाने का ऐलान किया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को अपने निवास से बाहर भेज दिया। उल्लेखनीय है कि लालू प्रसाद इस समय स्वास्थ्य जांच के लिए सिंगापुर में हैं, जहां वे अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के पास ठहरे हुए हैं। सुरक्षा वापस किए जाने के बाद रोहिणी ने पार्टी के नेताओं से राबड़ी आवास पर पहुंचने की अपील की।


सुरक्षा वापस लेने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता राबड़ी आवास पर इकट्ठा हो गए। गेट पर एक कार्यकर्ता हाथ में डंडा लिए खड़ा हो गया और जहां पहले पुलिसकर्मी बैठते थे, वहां पार्टी के नेता बैठे। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मैं सभी लालूवादियों से अपील करती हूं कि आप भारी संख्या में राबड़ी देवी जी के आधिकारिक आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री को स्पष्ट संदेश दें कि आप ही लालू परिवार की असली सुरक्षा हैं।'


राजद का विरोध

राजद ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा और विमान तक गाड़ी ले जाने की सुविधा देने का मुद्दा भी उठाया। सुरक्षा हटाए जाने पर राजद के नेता शक्ति सिंह यादव ने कहा, 'लालू प्रसाद और राबड़ी देवी दोनों पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। पहले उन्हें घर को लेकर धोखा दिया गया, फिर घर खाली करने की धमकी दी गई। पूरे परिवार की सुरक्षा में कटौती की गई। यह एक साजिश है। वे विपक्ष को दबाना चाहते हैं। लोकतंत्र में ऐसी राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं है। यह बिहार के लोगों को स्वीकार्य नहीं है।'