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बीएमसी चुनाव में एकनाथ शिंदे की भूमिका पर सवाल उठते हैं

महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव के संदर्भ में एकनाथ शिंदे की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हो रही है। देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व में भाजपा ने शिंदे की पार्टी को 90 सीटें दी हैं, जिससे उनकी उपयोगिता की परीक्षा होगी। यदि उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन इस चुनाव में असफल होता है, तो शिव सेना का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। जानिए इस चुनाव में शिंदे की भूमिका और भाजपा की रणनीति के बारे में।
 

एकनाथ शिंदे की राजनीतिक स्थिति

महाराष्ट्र में जब से देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बने हैं और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री बने हैं, तब से शिंदे की पार्टी के टूटने की अटकलें लगातार सुनने को मिल रही हैं। उनके मंत्रियों की अनदेखी की खबरें भी कई बार आई हैं। जब भी ऐसी बातें उठती हैं, शिंदे दिल्ली दौरे पर जाते हैं और लौटने के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। चर्चा कुछ समय के लिए थम जाती है। इस बीच, यह भी कहा जाता है कि महाराष्ट्र भाजपा के नेता, विशेषकर फड़नवीस और उनकी टीम, शिंदे की पार्टी को खत्म करना चाहती है। उनका मानना है कि शिंदे ने अपनी भूमिका निभा ली है, जिसमें शिव सेना को तोड़ना और उद्धव ठाकरे को कमजोर करना शामिल था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में उनकी उपयोगिता अभी भी बनी हुई है, तभी उन्हें बार-बार समर्थन मिल रहा है।


बीएमसी चुनाव और शिंदे की भूमिका

बृहन्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर शिंदे को महत्वपूर्ण भूमिका दी है। भाजपा ने उनकी पार्टी को 90 सीटें आवंटित की हैं। बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा खुद 137 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शिंदे की शिव सेना 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जानकारों का कहना है कि बीएमसी का चुनाव शिंदे के लिए अंतिम परीक्षा है। यदि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन को इस चुनाव में असफलता मिलती है, तो शिव सेना का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। भाजपा के नेता इस जोखिम को नहीं लेना चाहते, इसलिए शिंदे को बनाए रखा गया है।


शिंदे की उपयोगिता की परीक्षा

बीएमसी चुनाव में एकनाथ शिंदे की उपयोगिता की परीक्षा भी होने वाली है। उन्हें जो 90 सीटें मिली हैं, उनमें से अधिकांश ऐसे क्षेत्र हैं जो पारंपरिक रूप से शिव सेना का गढ़ रहे हैं। यदि शिंदे के उम्मीदवारों को इतना वोट मिलता है कि उद्धव और राज ठाकरे के उम्मीदवार हार जाएं, तो भाजपा का काम बन जाएगा। शिंदे की जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि ठाकरे के उम्मीदवार हारें। भले ही वोट बंटवारे में कांग्रेस जीत जाए, भाजपा को उम्मीद है कि इस रणनीति से दोनों शिव सेना को समाप्त किया जा सकेगा। भाजपा अपने 137 सीटों में से इतनी सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है कि वह जोड़-तोड़ करके अपना मेयर बना सके। एक बार भाजपा ने अपनी ट्रिपल इंजन सरकार बना ली, तो वह अपनी राजनीतिक रणनीति के अनुसार आगे बढ़ेगी।