बीमा क्लेम खारिज होने के प्रमुख कारण और समाधान
बीमा क्लेम खारिज होने के कारण
बीमा क्लेम खारिज होने के कारण: सड़क पर वाहन दुर्घटनाएं किसी भी चालक के लिए मानसिक और वित्तीय संकट का कारण बन सकती हैं। ऐसे में यदि बीमा क्लेम खारिज हो जाए, तो यह समस्या और बढ़ जाती है। कई लोग मानते हैं कि बीमा कंपनियां जानबूझकर भुगतान से बचती हैं, लेकिन असल में यह पॉलिसीधारक की कुछ गंभीर गलतियों के कारण होता है। यदि वाहन मालिक इन गलतियों को पहचान लें, तो वे अपने वित्तीय नुकसान से बच सकते हैं।
नशे में ड्राइविंग का प्रभाव
देश के कानून के अनुसार, शराब या नशीले पदार्थों के प्रभाव में गाड़ी चलाना एक दंडनीय अपराध है। यदि दुर्घटना के समय चालक नशे में पाया जाता है, तो बीमा कंपनी तुरंत क्लेम खारिज कर देती है। ऐसे में वाहन को हुए नुकसान की भरपाई पॉलिसीधारक को खुद करनी पड़ती है।
अमान्य ड्राइविंग लाइसेंस
क्लेम खारिज होने का एक और बड़ा कारण ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित लापरवाही है। यदि कोई व्यक्ति दोपहिया वाहन के लाइसेंस पर कार चलाता है या एक्सपायर लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाता है, तो बीमा कंपनियां क्षतिपूर्ति देने से मना कर देती हैं। दुर्घटना के समय चालक के पास उस श्रेणी का वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।
सूचना में देरी का असर
हर बीमा पॉलिसी में दुर्घटना की सूचना देने की एक निश्चित समय सीमा होती है। यदि यह समय सीमा पार हो जाती है, तो दावा 'लेट इंटिमेशन' मानकर खारिज किया जा सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि दुर्घटना के तुरंत बाद बीमा कंपनी को सूचित करना चाहिए, ताकि कागजी कार्रवाई में कोई बाधा न आए।
निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग
कई लोग व्यक्तिगत उपयोग के लिए ली गई पॉलिसी के तहत गाड़ी को कैब, टैक्सी या डिलीवरी जैसे व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल करते हैं। व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग पॉलिसी की आवश्यकता होती है, इसलिए यदि पर्सनल कार का व्यावसायिक उपयोग साबित होता है, तो दावा निरस्त हो जाता है। इसके अलावा, बिना कंपनी की अनुमति के इंजन या बॉडी में बड़े बदलाव करने पर भी कोई लाभ नहीं मिलता।
क्लेम खारिज होने पर क्या करें?
यदि पॉलिसीधारक को लगता है कि कंपनी ने वैध दस्तावेज होने के बावजूद गलत तरीके से दावा खारिज किया है, तो उसके पास शिकायत करने के कई कानूनी विकल्प हैं। सबसे पहले, बीमा कंपनी के आंतरिक शिकायत निवारण सेल में लिखित आवेदन देकर समीक्षा की मांग की जा सकती है। यदि वहां समाधान नहीं मिलता, तो नियामक संस्था 'इरडा' के पास ऑनलाइन या ऑफलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।