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बृजभूषण शरण सिंह का आरक्षण पर विवादास्पद बयान

अयोध्या में परशुराम जयंती के अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह ने आरक्षण पर एक विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं है और पारंपरिक समुदायों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनके विचारों ने समाज में चर्चा को जन्म दिया है। जानें उनके भाषण में क्या कहा गया और इसके पीछे की सोच क्या है।
 

अयोध्या में परशुराम जयंती पर बृजभूषण का बयान


अयोध्या: परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में, कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आरक्षण और संविधान के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “75 नहीं, 175 साल तक आरक्षण ले लो, हमें इसकी आवश्यकता नहीं है।” अपने भाषण में उन्होंने यह भी बताया कि कई पारंपरिक समुदाय आज भी विकास की मुख्यधारा से बाहर हैं। उन्होंने कहा, “इन 75 वर्षों में आपका कितना भला हुआ? मंडल आयोग आया, लेकिन फिर भी सभी का भला नहीं हुआ। कुछ लोगों को लाभ मिला, लेकिन असली हकदारों को नहीं। लोहार, कुम्हार, बढ़ई और तेली जैसे पारंपरिक समुदायों का भला नहीं हुआ।”


संविधान के निर्माण पर उन्होंने कहा, “संविधान केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर ने नहीं, बल्कि 242 सांसदों ने मिलकर बनाया था।” अपने भाषण में उन्होंने ‘काशी जी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक समाजसेवी थे जिन्होंने समाज को जागरूक किया। बृजभूषण सिंह ने कहा, “अगर आप आज अगड़े समाज की स्थिति देखना चाहते हैं, तो देखिए—हम गौशालाओं में काम करते हैं, रिक्शा चलाते हैं और मंदिरों में श्रम करते हैं। हम सफाई कर्मचारियों के रूप में भी कार्यरत हैं। हमने यह तय किया है कि हम आरक्षण का विरोध नहीं करेंगे।”


उन्होंने आगे कहा, “हमने सहमति से राजपाठ और जमींदारी छोड़ी है, और हमें इसका कोई पछतावा नहीं है, लेकिन आपके जीवन में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आ रहा है। आपके समाज में कुछ असली और नकली लोग हैं, जो ऊँचे स्थानों पर बैठे हैं और आपको आगे बढ़ने नहीं देना चाहते।”