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बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के आरोपों में बरी किया गया

दिल्ली की अदालत ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के आरोपों में बरी कर दिया है। यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है, जिसमें ओलंपिक पदक विजेताओं का भी नाम शामिल है। अदालत ने सह-आरोपी विनोद तोमर को भी बरी किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
 

दिल्ली की अदालत का फैसला

नई दिल्ली - दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न के आरोपों से मुक्त कर दिया।


बृजभूषण शरण सिंह ने सोमवार सुबह राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश होकर कहा, "जो कुछ भी होगा, कोर्ट कहेगा, हम अभी कुछ नहीं कहेंगे।" सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने उन्हें बरी करने का निर्णय सुनाया। सह-आरोपी विनोद तोमर को भी इसी मामले में बरी किया गया है। अदालत ने 2 जुलाई को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला छह महिला पहलवानों द्वारा बृजभूषण पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है।


जनवरी 2023 में, जब नए संसद भवन का उद्घाटन हो रहा था, ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने साथी पहलवान विनेश फोगाट के साथ मिलकर पूर्व भाजपा सांसद पर यौन उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया।


इनकी शिकायतों के आधार पर पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। दिल्ली पुलिस की एफआईआर में बृजभूषण के अलावा डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर का नाम भी शामिल था। जून 2023 में, पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ कई धाराओं के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया। ट्रायल कोर्ट ने मई 2024 में 5 महिला पहलवानों के उत्पीड़न और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। एक नाबालिग पहलवान ने भी बृजभूषण पर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (पोक्सो एक्ट) के तहत उस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की। इसके बाद मामला बंद कर दिया गया था।