×

बैंक ऑफ इंडिया ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए साइबर धोखाधड़ी पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

बैंक ऑफ इंडिया ने वरिष्ठ नागरिकों को लक्षित साइबर धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में धोखाधड़ी की पहचान, रोकथाम और समय पर रिपोर्टिंग के तरीकों पर चर्चा की गई। फील्ड महाप्रबंधक और धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने प्रतिभागियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। जानें इस कार्यक्रम के मुख्य बिंदु और वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने के उपाय।
 

साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की पहल

नई दिल्ली: वरिष्ठ नागरिकों को लक्षित कर हो रही बढ़ती साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए, बैंक ऑफ इंडिया ने अपने कर्मचारियों, 82 शाखाओं के प्रबंधकों और विभिन्न बिजनेस वर्टिकल प्रमुखों के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फील्ड अधिकारियों को धोखाधड़ी की पहचान, रोकथाम और समय पर रिपोर्टिंग के लिए सक्षम बनाना था।


इस कार्यक्रम में फील्ड महाप्रबंधक श्री लोकेश कृष्ण ने भाग लिया और उन्होंने फील्ड स्तर पर आमतौर पर सामने आने वाले धोखाधड़ी के तरीकों और उनसे बचने के उपायों पर चर्चा की।


इस अवसर पर, मुंबई के धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक श्री वासु देव ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने परिचालन, साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी के विभिन्न प्रकारों और उनसे निपटने के प्रभावी तरीकों पर प्रकाश डाला।


कार्यक्रम में विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को प्रभावित करने वाली साइबर ठगी पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें 'डिजिटल अरेस्ट', एपीके फाइलों के माध्यम से केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर धोखाधड़ी, और अनधिकृत लिंक पर क्लिक करने के मामलों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को प्रारंभिक चेतावनी संकेतों की पहचान करने, उचित सावधानी बरतने और निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए जागरूक किया गया।


अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों को सलाह दी कि वे वरिष्ठ नागरिकों को इन साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की जानकारी दें। इसके अलावा, प्रतिभागियों को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के बारे में भी बताया गया, जो गृह मंत्रालय की एक पहल है और जिसका उद्देश्य साइबर अपराधों की रोकथाम, पहचान, जांच और अभियोजन को समन्वित करना है।