बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी को गुजारा भत्ता देने का आदेश
महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी के प्रति कथित क्रूरता से संबंधित एक याचिका पर ऐसा निर्णय दिया है, जिसे महिला सशक्तीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि पत्नी घरेलू कार्य नहीं करती और अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करती, इसलिए उसे क्रूरता के आधार पर तलाक दिया जाए। यह निर्णय कुछ लोगों को असहज कर सकता है।
पति को सिखाया सबक
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पति को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पति हर महीने अपनी पत्नी को 10,000 रुपये गुजारा भत्ता और 10,000 रुपये आवास के लिए देना होगा। यह निर्णय लोगों को चौंका रहा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी दिलचस्प है।
तलाक की याचिका का कारण
यह मामला 2004 का है। पति ने अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा कि उसकी पत्नी घरेलू कार्य नहीं करती, खाना नहीं बनाती, और उसके व्यवहार में तीखापन है। उसने यह भी कहा कि पत्नी अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करती, जिससे उसे मानसिक तनाव हो रहा है।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, 'अगर पत्नी घर के काम नहीं कर पाती या खाना नहीं बना पाती, तो यह क्रूरता नहीं है। शादी एक समानता का रिश्ता है, यह कोई सेवा अनुबंध नहीं है। पत्नियां नौकर नहीं हैं।'
फैसले की पृष्ठभूमि
कोर्ट ने कहा कि पत्नी का घरेलू कार्य करने से इनकार करना क्रूरता नहीं है। 8 मई 2026 को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने 2010 में बांद्रा फैमिली कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें तलाक की अनुमति दी गई थी और पति को गुजारा भत्ता देने से छूट दी गई थी।
गुजारा भत्ता का निर्धारण
जब पति ने तलाक की याचिका दी थी, तब पत्नी ने गुजारा भत्ता मांगा था। कोर्ट ने कहा कि 2010 में फैमिली कोर्ट का गुजारा भत्ता देने से इनकार करना एक 'आर्ट और क्राफ्ट क्लास' के विज्ञापन के आधार पर था, जिसका कोई ठोस प्रमाण नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कौशल का होना और कभी-कभी कमाई करना नियमित आय का स्रोत नहीं हो सकता।
पति को हर महीने 20,000 रुपये देने का आदेश
कोर्ट ने कहा कि पति एक चार्टर्ड अकाउंटेंट है और उसकी स्थिर आय है, इसलिए उसे हर महीने पत्नी को 10,000 रुपये गुजारा भत्ता और कम से कम 10,000 रुपये आवास खर्च के लिए देना होगा।