बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया
तरुण तेजपाल को मिली कानूनी राहत का पलटा फैसला
मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को 2013 के एक प्रमुख यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व ‘तहलका’ संपादक तरुण तेजपाल को दी गई निचली अदालत की राहत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने मापुसा सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी करने के निर्णय को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अब उनकी सजा के निर्धारण के लिए अलग से सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसंडेकर की खंडपीठ ने गोवा सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। इस दौरान तरुण तेजपाल अदालत में उपस्थित थे। कोर्ट ने पहले ही उन्हें निर्णय सुनाए जाने के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं किया गया है।
यह निर्णय गोवा सरकार की ओर से राज्य की सीआईडी द्वारा दायर अपील पर आधारित है। राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने पक्ष रखा।
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब ‘तहलका’ पत्रिका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि गोवा में आयोजित पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था।
मापुसा की सेशंस कोर्ट ने मई 2021 में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है।