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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मतदाता सूची में नाम हटाने पर दी कोई राहत नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। याचिकाकर्ता ने मतदाता हितों की सुरक्षा की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे जनहित याचिका नहीं मानते हुए राहत देने से मना कर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में और क्या कहा गया है।
 

बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला

मुंबई में, महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए समान विषय पर समानांतर आदेश पारित करना उचित नहीं होगा। इस मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है।


चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ

सुनवाई के दौरान, चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने बताया कि SIR से संबंधित कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुनवाई कर रहा है। उन्होंने 24 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में हाईकोर्ट और राज्य सरकारों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने से रोका गया है।


याचिकाकर्ता का मतदाता हितों का हवाला

याचिकाकर्ता सागर गवई की ओर से अधिवक्ता प्रकाश आंबेडकर ने अदालत से कहा कि उनकी याचिका का दायरा सीमित है। उन्होंने महाराष्ट्र के मतदाताओं के हितों की सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सकती है।


हाईकोर्ट का अंतरिम राहत देने से इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह माना कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में महाराष्ट्र का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है, लेकिन SIR से जुड़े समान मुद्दों पर शीर्ष अदालत में सुनवाई जारी रहने के कारण हाईकोर्ट के स्तर पर समानांतर कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने याचिकाकर्ता की अंतरिम राहत की मांग को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामला जनहित याचिका नहीं, बल्कि रिट याचिका है।


अदालत का स्पष्ट निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब SIR से संबंधित मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब मतदाता सूची से नाम नहीं हटाने का अलग आदेश जारी करना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही अदालत ने मामले को तीन सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।