ब्रिक्स 2026: भारत की मेज़बानी में वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत
नई दिल्ली: एक बार फिर, नई दिल्ली ने वैश्विक कूटनीति के प्रमुख मंच के रूप में अपनी पहचान बनाई है। भारत द्वारा आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य उद्घाटन हो चुका है, जिसमें विश्व के कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बहुपरकारी मंच के माध्यम से, भारत न केवल वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती दे रहा है, बल्कि भू-राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सहयोग की नई दिशा भी निर्धारित कर रहा है।
व्यापारिक सहयोग और स्थानीय मुद्रा का महत्व
व्यापारिक साझेदारी और स्थानीय मुद्रा में लेनदेन पर जोर
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान, भारत के केंद्रीय मंत्रियों ने आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एक योजना प्रस्तुत की। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य बनाने पर जोर दिया। भारत ने ब्रिक्स देशों से अनुरोध किया कि वे अपनी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को एकीकृत करें और आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में बढ़ावा दें। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और छोटे व मध्यम उद्योगों (MSME) को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं से निपटने में मदद मिलेगी।
शी जिनपिंग का भारत दौरा और क्षेत्रीय कूटनीति
शी जिनपिंग का दौरा और क्षेत्रीय कूटनीति
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह दौरा वैश्विक स्तर पर विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ, नेताओं के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर संवाद होना भी तय है। इसके अलावा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। यह उनकी भारत की पहली यात्रा है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
मोदी-पुतिन की महत्वपूर्ण बैठक
मोदी-पुतिन मुलाकात और रणनीतिक समझौते
सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच भारत मंडपम में लगभग 45 मिनट तक गहन द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के उन्नयन और एस-400 की शेष आपूर्ति शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की तैयारी
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए नई दिल्ली को अभेद्य किले में बदल दिया गया है। दिल्ली पुलिस के 15,000 से अधिक जवानों और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियों को सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किया गया है। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए, सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्री को एक ही बस में यात्रा करने का निर्देश दिया है। इस प्रकार, 18वां ब्रिक्स सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि आर्थिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और वैश्विक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।