ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत की वैश्विक भूमिका में बदलाव
भारत की मेज़बानी में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली: इस सप्ताहांत, भारत 11 सदस्यीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। इस दौरान, न केवल सम्मेलन की बैठकों पर, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पहले, भारत ब्रिक्स जैसे मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रहा था, लेकिन अब वह अपने अनुभव और स्वदेशी समाधानों के माध्यम से वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। 2012 में पहली बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के बाद से भारत का कद काफी ऊँचा हुआ है।
भारत की स्थिति में बदलाव
यदि हम 14 साल पहले और आज के भारत की तुलना करें, तो तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। पहले भारत को ब्रिक्स का अपेक्षाकृत कमजोर सदस्य माना जाता था, जबकि अब भारत में आयोजित सम्मेलन को पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले जी7 जैसे समूहों के समकक्ष एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिक्स अब बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था की आवाज बनता दिखाई दे रहा है।
2012 में भारत की स्थिति
जब भारत ने 2012 में पहली बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी, तब दुनिया यूरोजोन के कर्ज संकट से जूझ रही थी। उस समय भारत भी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। विकास की गति धीमी हो रही थी, महंगाई उच्च स्तर पर थी और रुपये की स्थिति भी कमजोर थी। इन परिस्थितियों ने भारत के प्रदर्शन को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने उस समय भारत को ब्रिक्स देशों में सबसे कम आकर्षक अर्थव्यवस्था बताया था।
यहां तक कि चर्चा होने लगी थी कि क्या इंडोनेशिया को समूह में शामिल करके भारत की जगह दी जानी चाहिए। उसी समय स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भी चेतावनी दी थी कि भारत पहला ब्रिक देश हो सकता है, जो निवेश योग्य संप्रभु रेटिंग खो दे। 2012-13 में भारत की आर्थिक विकास दर 5 प्रतिशत से नीचे चली गई थी और महंगाई दोहरे अंक तक पहुंच गई थी। ऐसे माहौल में वैश्विक स्तर पर भारत को ब्रिक्स की कमजोर कड़ी के तौर पर देखा जाने लगा था।
2026 में भारत की नई तस्वीर
अब 2026 में, स्थिति काफी बदल चुकी है। भारत को ब्रिक्स की मजबूत विकास अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की विकास क्षमता ने उसके महत्व को और बढ़ाया है। भारत की संप्रभु रेटिंग में भी सुधार हुआ है।
सितंबर 2026 में, जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग BBB+ से बढ़ाकर A- कर दी और नजरिया स्थिर रखा। एजेंसी ने आर्थिक विकास की मजबूती, बेहतर राजकोषीय स्थिति, मजबूत वित्तीय व्यवस्था और अच्छी बाहरी स्थिति को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया।
भारत का बढ़ता रणनीतिक प्रभाव
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति का महत्व लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत संतुलन बनाने वाली शक्ति के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
नई दिल्ली में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। यह सम्मेलन भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत के साथ-साथ उसकी वैश्विक आयोजन क्षमता और रणनीतिक महत्व का भी बड़ा संकेत है।