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ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी ने तकनीक और खनिजों के शस्त्रीकरण पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के शस्त्रीकरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक विकास के लिए समावेशिता पर जोर दिया और ब्रिक्स देशों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। मोदी ने कहा कि बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चार स्तंभों पर आधारित समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता।
 

ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीकी और महत्वपूर्ण खनिजों के शस्त्रीकरण के मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक विकास और साझा समृद्धि के लिए एक बाधा बन सकता है। उन्होंने दुनिया भर में बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका आम लोगों के जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया ताकि ग्लोबल साउथ के समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।


 


सम्मेलन के दौरान, पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के समक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के शस्त्रीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, 'प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का शस्त्रीकरण हमारी साझा प्रगति में बाधा डाल सकता है। इसलिए हमने प्रौद्योगिकी को अपनाने में समावेशिता पर जोर दिया है।'


 


रेयर अर्थ पर पीएम मोदी का यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के वर्षों में चीन ने इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है और उच्च क्षमता वाली तकनीक साझा करने में भी रोक लगाई है। जिनपिंग के सामने पीएम मोदी का यह संबोधन सीधे तौर पर चीन को चुनौती देता है।


समावेशी विकास को बढ़ावा

अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'भारत की अध्यक्षता में हमने अपने प्रयासों को चार स्तंभों- लचीलापन, नवाचार, सहयोग और वहनीयता पर केंद्रित किया है। मुझे खुशी है कि आपके सहयोग से हम अपनी साझा सोच को ऐसी स्थिति में बदलने में सफल रहे हैं, जिसमें सभी पक्षों को लाभ हो।'


 


उन्होंने आगे कहा, 'इन चार स्तंभों के आधार पर हमने ब्रिक्स के माध्यम से समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारा मानना है कि ब्रिक्स के भीतर विकसित समाधानों का लाभ केवल इसी समूह तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें 'ग्लोबल साउथ' की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनुकूल और सुलभ बनाया जाना चाहिए।'


'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं'

पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ का ब्रिक्स पर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया में बढ़ते तनाव का आम लोगों के जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। महामारियों, जलवायु संबंधी आपदाओं और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों ने यह साबित किया है कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।


 


विविधता और सहयोग में ब्रिक्स की ताकत

पीएम मोदी ने कहा, 'मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि ब्रिक्स में 'ग्लोबल साउथ' के देशों का भरोसा बढ़ा है, क्योंकि उनकी बात सुनी जाती है। उनके अनुभवों का सम्मान किया जाता है और समाधान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर तैयार किए जाते हैं। ब्रिक्स की ताकत हमारी विविधता और सहयोग में है। भले ही हमारी परिस्थितियां अलग-अलग हों, लेकिन हम सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ते हैं और मानवता के लिए फलते-फूलते हैं। हमारी विविधता हमारी पहचान बनी रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी तरक्की से पूरी मानवता को लाभ हो।'