ब्रिक्स सम्मेलन: वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ता महत्व
ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व
दुनिया भर की नजरें भारत में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन पर टिकी हुई हैं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष अपने चरम पर है। अमेरिका की एकतरफा नीतियों, टैरिफ के दुरुपयोग और सहयोगी देशों को धमकाने की प्रवृत्ति से वैश्विक समुदाय थक चुका है। छोटे और बड़े देशों को एक ऐसा मंच चाहिए, जो आपसी सम्मान और समझ के आधार पर आगे बढ़े। नीतियों को थोपने के बजाय सहमति पर आधारित होना चाहिए। इन कारणों से ब्रिक्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
पुतिन का बयान
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने ब्रिक्स को एक उभरते संगठन के बजाय वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने वाला संगठन बताया। उन्होंने जी7 पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक जीडीपी का 40 प्रतिशत हिस्सा ब्रिक्स देशों से आया है, जबकि जी7 का योगदान केवल 29 प्रतिशत रहा। इस बयान ने ब्रिक्स की बढ़ती ताकत पर चर्चा को जन्म दिया।
ब्रिक्स का परिचय
ब्रिक्स का गठन 2006 में हुआ था, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे, जिसे BRIC कहा जाता था। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसे BRICS नाम दिया गया। वर्तमान में, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित कुल 11 पूर्ण सदस्य हैं। 2025 में बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को भागीदार देशों के रूप में शामिल किया जाएगा।
जी7 का इतिहास
1975 में पहले 'विश्व आर्थिक शिखर सम्मेलन' का आयोजन किया गया, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, इटली, जापान, ब्रिटेन और पश्चिम जर्मनी शामिल थे। इसे ग्रुप ऑफ सिक्स कहा गया। 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद इसे जी7 नाम दिया गया। 1998 में रूस के शामिल होने पर इसे जी8 कहा गया, लेकिन 2014 में क्रीमिया पर हमले के बाद रूस की सदस्यता निलंबित कर दी गई। वर्तमान में जी7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं।
ब्रिक्स की वृद्धि
जी7 एक समय में दुनिया का सबसे शक्तिशाली समूह था, लेकिन अब इसकी ताकत और आर्थिक प्रभाव घट रहा है। 1975 में जी7 देशों की वैश्विक जीडीपी में 63 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो 2022 में घटकर 43 प्रतिशत रह गई। 2006 में ब्रिक्स का गठन होने पर उसकी जीडीपी जी7 देशों की आधी थी, लेकिन 2020 में ब्रिक्स ने जी7 को पीछे छोड़ दिया। वर्तमान में, ब्रिक्स दुनिया की 49.5 प्रतिशत जनसंख्या, 40 प्रतिशत जीडीपी और 26 प्रतिशत व्यापार का नेतृत्व करता है।
ब्रिक्स और जी7 की तुलना
2000 में भारत, रूस, ब्राजील और चीन की वैश्विक जीडीपी में 23 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि जी7 की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत थी। 2024 में जी7 की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत पर आ गई, जबकि ब्रिक्स 36.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्तमान में, ब्रिक्स देशों की जीडीपी का हिस्सा 41 प्रतिशत है, जबकि जी7 का हिस्सा 29 प्रतिशत है। हालांकि, नॉमिनल जीडीपी में जी7 अभी भी बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसमें उसकी कुल जीडीपी 55 ट्रिलियन डॉलर है।
ब्रिक्स का भविष्य
ब्रिक्स 49.5 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि जी7 में केवल 10 प्रतिशत जनसंख्या है। ब्रिक्स बहुध्रुवीय व्यवस्था का समर्थन करता है, जबकि जी7 पुराने विश्व व्यवस्था का पक्षधर है। जी7 में अमेरिका की हिस्सेदारी 31.82 ट्रिलियन डॉलर है, जो 58.36 प्रतिशत है। वहीं, ब्रिक्स में भारत और चीन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है।