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भविष्य में एआई रोबोट्स का घरों में प्रवेश: भारतीयों की भूमिका

आने वाले समय में एआई रोबोट्स आपके घरों में आम काटने और अन्य कार्य करते हुए दिखाई दे सकते हैं। भारतीय नागरिक अपने दैनिक कार्यों को रिकॉर्ड करके इन रोबोट्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं। जानें कैसे महिलाएं एआई प्रशिक्षक बन रही हैं और पारंपरिक कौशल को मशीनों में स्थानांतरित किया जा रहा है। क्या यह तकनीक भविष्य में रोजगार संकट पैदा कर सकती है? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

एआई रोबोट्स का उदय

आने वाले समय में, एआई रोबोट्स आपके घरों में आम काटने, सफाई करने और रसोई में चाय या कॉफी बनाने का कार्य करते हुए नजर आ सकते हैं। इस वास्तविकता को साकार करने के लिए तकनीकी कंपनियां भारतीय नागरिकों की सहायता से रोबोट्स को प्रशिक्षण दे रही हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लोग अपने सिर पर स्मार्टफोन और विशेष मोशन सेंसर बांधकर अपने दैनिक कार्यों का रिकॉर्ड बना रहे हैं। इस अनोखे तरीके से, भारतीय अपने कौशल और कार्य विधियों को सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित रोबोट्स के ज्ञान में जोड़ रहे हैं.


महिलाएं बनीं एआई प्रशिक्षक

चेन्नई की एक साधारण गृहिणी, जो अपने किचन में स्मार्टफोन बांधकर आम काटती हैं, अब एआई रोबोट को रसोई की बारीकियां सिखाने वाली एक पेशेवर प्रशिक्षक बन गई हैं। उन्हें डेटा कंपनी द्वारा प्रति घंटे 250 रुपये (लगभग 2.6 डॉलर) का भुगतान किया जा रहा है। इस महिला का कहना है कि घर के काम के लिए एक घंटे के 250 रुपये मिलना एक अच्छा अवसर है। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि भविष्य में वह अपने घरेलू कार्यों के लिए एक ऐसा रोबोट खरीदने की योजना बना रही हैं.


डेटा भेजने की प्रक्रिया

यह प्रक्रिया एक तकनीकी चैनल के माध्यम से संचालित होती है। जब प्रशिक्षक का हाथ कैमरे के फ्रेम से बाहर चला जाता है, तो मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत 'हाथ डिटेक्ट नहीं हुआ' का अलर्ट दिखाई देता है। इस सटीक वीडियो डेटा को एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए एआई डेटा कंपनी को भेजा जाता है। यह टेक कंपनी भारत और अमेरिका में स्थित है और यह दुनिया की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए कार्य करती है. डेवलपर्स का मानना है कि इस 'ईगोसेंट्रिक डेटा' (फर्स्ट-पर्सन फुटेज) की मदद से रोबोट वास्तविक दुनिया में मानव क्रियाओं की सटीक नकल करना सीखते हैं.


पारंपरिक कौशल का एआई में समावेश

केवल रसोई के कार्य ही नहीं, बल्कि पारंपरिक कौशल भी एआई के माध्यम से मशीनों में स्थानांतरित किया जा रहा है। बेंगलुरु में पिछले दस वर्षों से फूलों की माला बनाने वाली 55 वर्षीय पोन्नी को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। हालांकि, पोन्नी इस नई तकनीक को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यदि रोबोट्स ने यह कार्य सीख लिया, तो अगली पीढ़ी के लिए रोजगार का संकट उत्पन्न हो सकता है.


2050 तक एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट

चैटजीपीटी जैसे सॉफ़्टवेयर के लिए डिजिटल डेटा को प्रोसेस करना आसान है, लेकिन भौतिक दुनिया में मशीनों से कार्य करवाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस चुनौती को हल करने के लिए कुछ एआई प्रशिक्षक घर से और कुछ फैक्ट्रियों और विशेष स्टूडियो में मोशन सेंसर पहनकर रोबोट्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का अनुमान है कि ह्यूमनॉइड रोबोट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, और 2050 तक दुनिया में एक अरब से अधिक रोबोट सक्रिय होंगे, जिनका उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक और व्यावसायिक कार्यों में किया जाएगा.