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भाजपा के सोशल मीडिया समीकरण में बिखराव: यूजीसी नियमावली का प्रभाव

हाल ही में लागू की गई यूजीसी की नई नियमावली ने भाजपा के सोशल मीडिया समीकरण को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले एकजुट राइटविंग इकोसिस्टम में अब बिखराव देखने को मिल रहा है, जिसमें प्रमुख समर्थक अजीत भारती ने बगावत का ऐलान किया है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी निशाना बनाया है। इस स्थिति में भाजपा का आईटी सेल भी उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहा है। जानें इस संघर्ष के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

भाजपा का सोशल मीडिया इकोसिस्टम प्रभावित

उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव समाप्त करने के लिए लागू की गई यूजीसी की नई नियामवली ने भाजपा के सामाजिक समीकरण को जमीनी स्तर पर प्रभावित किया है। हालांकि, इसका प्रभाव सोशल मीडिया पर कहीं अधिक स्पष्ट है। पहले भाजपा और राइटविंग का सोशल मीडिया इकोसिस्टम एकजुट था, जहां सभी सदस्य समान विचार साझा करते थे और एक ही प्रकार की पोस्ट साझा की जाती थीं, जो सरकार, भाजपा और संघ की प्रशंसा करती थीं। निगेटिव खबरों को सकारात्मकता में बदलने की कला में भाजपा का राइटविंग सबसे कुशल था। भाजपा आईटी सेल के अमित मालवीय द्वारा दिए गए स्पिन को मुख्यधारा का नैरेटिव माना जाता था। लेकिन अब यह संरचना बुरी तरह से टूट गई है, और यहां तक कि अमित मालवीय और अन्य स्पिन मास्टर भी आलोचना के घेरे में आ गए हैं.


अजीत भारती की बगावत

भाजपा और राइटविंग के प्रमुख समर्थकों में से एक अजीत भारती ने बगावत का ऐलान किया है। यूजीसी की नई नियमावली के बाद, उन्होंने पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाना बनाया और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत पर भी हमला कर रहे हैं। अजीत भारती के साथ राइटविंग के कई सवर्ण सदस्य भी हैं, और बिहार की पूरी टीम उनके समर्थन में आ गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि भाजपा का आईटी सेल उनकी छवि को धूमिल करने के लिए सक्रिय हो गया है। अजीत भारती के 12 साल पुराने पोस्ट को सामने लाकर यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि वे पहले वामपंथी थे और भाजपा पर हमले करते थे। इस प्रकार, अजीत भारती और भाजपा की आईटी सेल के बीच एक संघर्ष शुरू हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार और भाजपा का हर नैरेटिव उलट रहा है.