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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में तनाव: टैरिफ में वृद्धि की चेतावनी

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद पर नियंत्रण नहीं लगाता है, तो अमेरिकी टैरिफ में कोई छूट नहीं मिलेगी। इस बीच, भारत ने अमेरिकी दबाव का सामना करने का संकेत दिया है। जानें इस जटिल वार्ता के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव

भारत-अमेरिका टैरिफ समाचार: भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद पर नियंत्रण नहीं लगाता है, तो अमेरिका भारतीय आयातों पर लगाए गए टैरिफ में कोई छूट नहीं देगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है, जो कि ब्राजील के बाद किसी अन्य देश के लिए सबसे अधिक है।


अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक केविन हैसेट ने भारत के साथ चल रही व्यापार वार्ता को 'जटिल' बताते हुए आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाजार को खोलने में 'अड़ियल' रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा, 'अगर भारतीय नहीं झुकते, तो मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप भी झुकेंगे।' हैसेट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के साथ बातचीत की जटिलता का एक बड़ा कारण रूस पर बढ़ता दबाव है, जिसका उद्देश्य शांति समझौते को सुनिश्चित करना और लाखों लोगों की जान बचाना है।



भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की तुलना मैराथन से


हैसेट ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता की तुलना एक मैराथन से की, जिसमें उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा, 'जब आप व्यापार वार्ता को देखते हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि अंतिम स्थिति तक पहुंचने से पहले उतार-चढ़ाव आते रहेंगे।' यह बयान व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान आया, जहां उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका का रुख मजबूत है और भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाना होगा।


हम अंत में एक साथ आएंगे: बेसेन्ट


ट्रंप के सलाहकार हैसेट की यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट की पूर्व टिप्पणियों से मेल खाती है। बेसेन्ट ने स्पष्ट किया था कि भारत पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ केवल रूसी तेल की खरीद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की लंबी प्रक्रिया के कारण भी हैं। बुधवार को फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में बेसेन्ट ने कहा, 'मैंने सोचा था कि मई या जून में हमारा सौदा हो जाएगा; भारत सबसे शुरुआती सौदों में से एक हो सकता है। लेकिन उन्होंने हमें किसी तरह से अपने साथ जोड़ लिया।' उन्होंने बातचीत के दौरान नई दिल्ली के रवैये को 'थोड़ा असहयोगात्मक' बताते हुए कहा, 'यह एक बहुत ही जटिल संबंध है।' हालांकि, आशावादी नजरिए से बेसेन्ट ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मुझे लगता है कि अंत में हम एक साथ आएंगे।'


ट्रम्प के टैरिफ पर भारत का रुख


दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि वे देश के किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेंगे। सरकार के आकलन के अनुसार, इन शुल्कों का सीधा असर अमेरिका को होने वाले 48.2 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर पड़ेगा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नए टैरिफ का तात्कालिक प्रभाव सीमित लग सकता है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव से कई चुनौतियां उत्पन्न होंगी, जिनका समाधान तत्काल आवश्यक है।