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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अड़चनें: पीयूष गोयल का बयान

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई प्रगति नहीं हो पाई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत को अमेरिकी बाजार में अपने निर्यात के लिए टैरिफ में विशेष लाभ की आवश्यकता है। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में और क्या हैं भारत की अपेक्षाएँ।
 

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की स्थिति


कई दौर की वार्ता के बावजूद समझौते में प्रगति नहीं


फरवरी 2025 से लेकर जून 2026 तक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। दोनों देशों के नेताओं ने इस समझौते को शीघ्रता से लागू करने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारतीय प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की।


हालांकि, इस बातचीत के परिणामस्वरूप कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि वार्ता लगभग समाप्ति की ओर है, लेकिन एक महत्वपूर्ण मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। भारत को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उसके निर्यात को अमेरिकी बाजार में अन्य देशों की तुलना में टैरिफ में लाभ मिले। गोयल ने कहा कि जब अमेरिका इस गारंटी को प्रदान करेगा, तब यह डील अंतिम रूप लेगी।


भारत की अपेक्षाएँ

इस देरी का एक प्रमुख कारण यह है कि भारत चाहता है कि अमेरिका को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर वियतनाम या बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क लागू हो। यदि भारतीय उत्पादों पर समान शुल्क लगाया जाता है, तो इस समझौते का आर्थिक महत्व काफी कम हो जाएगा।


डील पर हस्ताक्षर की शर्तें

गोयल ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत को टैरिफ में लाभ नहीं मिलता, तब तक इस डील पर हस्ताक्षर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जब तक तुलनात्मक लाभ का ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। दोनों देश इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं कि अमेरिका भारत को टैरिफ में कटौती कैसे कर सकता है।