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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील वार्ता स्थगित, ट्रंप की टैरिफ नीति पर संकट

भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील की वार्ता को स्थगित कर दिया गया है, इसके पीछे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है जिसने ट्रंप की टैरिफ नीति को खारिज कर दिया। इस फैसले ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। ट्रंप ने नई टैरिफ नीति के तहत 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। जानें इस स्थिति का क्या असर होगा।
 

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर नई स्थिति

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील की वार्ता अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रंप की टैरिफ नीति को खारिज कर दिया, जो उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। ट्रंप ने एक नए कानून के तहत पहले 10 फीसदी और फिर उसे बढ़ाकर 15 फीसदी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ट्रेड डील पर सहमति बन चुकी थी, जिसमें अमेरिका द्वारा भारत के उत्पादों पर 18 फीसदी टैरिफ लगाने की बात की गई थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्थिति को अनिश्चितता में डाल दिया है, जिसके चलते वार्ता को स्थगित किया गया है।


सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया

कल निर्धारित की थी बैठक

यह निर्णय अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद लिया गया है, जिसने ट्रंप की टैरिफ नीति को खारिज कर दिया। शुक्रवार को कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में पीठ ने कहा कि IEEPA के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल और ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े टैरिफ अवैध हैं। यह ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि इन टैरिफ के माध्यम से अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर भारी शुल्क लगाया था।

ट्रंप ने की जवाबी कार्रवाई

कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक नए आदेश के तहत सभी देशों पर 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए लागू होना था। लेकिन, शनिवार को उन्होंने इसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया, जो इस कानून के तहत अधिकतम सीमा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह उन देशों के खिलाफ है जो दशकों से अमेरिका का ‘शोषण’ कर रहे हैं। हालांकि, यह टैरिफ सेक्शन 122 जैसे अन्य प्रावधानों के तहत लगाए गए हैं, जो पहले वाले IEEPA टैरिफ से भिन्न हैं।