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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील पर ट्रंप का टैरिफ विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के पीछे के कारणों का खुलासा हुआ है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने बताया कि यह टैरिफ ट्रंप के अहंकार का परिणाम था, न कि किसी व्यापार नीति का। भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार डील पहले से तैयार थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप को कॉल न करने के कारण यह डील वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ करनी पड़ी। जानें इस विवाद के और भी पहलुओं के बारे में।
 

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का कारण


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को किसी व्यापार या नीति का परिणाम नहीं माना गया है, जैसा कि एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने एक साक्षात्कार में इसे ट्रंप के अहंकार का परिणाम बताया है।


हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, इसे टाला जा सकता था, लेकिन इसके लिए भारत को अपने स्वाभिमान को बनाए रखना पड़ता। प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार के बजाय देश की प्राथमिकता को चुना, जिसके परिणामस्वरूप भारत को 50% टैरिफ का सामना करना पड़ा।


अमेरिकी सचिव का बयान

अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी का खुलासा


हॉवर्ड लटनिक ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार डील पहले से तैयार थी। उन्होंने कहा कि यह डील पूरी तरह से सेट थी, लेकिन इसे अंतिम रूप देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप को कॉल करना आवश्यक था।


उन्होंने यह भी कहा कि भारत को बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए एक स्पष्ट समय सीमा दी गई थी, जिसमें तीन शुक्रवार का समय शामिल था। हालांकि, भारत सरकार इस प्रक्रिया में सहज नहीं थी, जिसके कारण मोदी ने कॉल नहीं किया। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत को वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ व्यापार डील करनी पड़ी।


भारत के साथ व्यापार डील की संभावनाएं

डील की उम्मीदें और वर्तमान स्थिति


लटनिक ने कहा कि पूरी डील तैयार थी, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह ट्रंप की डील थी। भारतीय अधिकारियों को केवल मोदी से राष्ट्रपति को कॉल करवाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिका ने अब भारत के साथ उन डीलों को अंतिम रूप देने से पीछे हट गया है।


उन्होंने यह भी बताया कि जब यूके के साथ डील करने का समय आया, तो प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को कॉल किया, जिससे डील उसी दिन पूरी हो गई।