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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता का नया दौर शुरू

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता सोमवार से पुनः शुरू हो रही है, जो चार दिनों तक चलेगी। इस वार्ता का उद्देश्य अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारत की ओर से दर्पण जैन वार्ता का संचालन करेंगे। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदु और दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों की स्थिति।
 

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की शुरुआत


नई दिल्ली में, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता सोमवार से पुनः आरंभ हो रही है। यह वार्ता कुछ समय के लिए स्थगित रही थी, लेकिन अब यह चार दिनों तक चलेगी। दोनों देश पहले से निर्धारित ढांचे के अनुसार सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। इस बैठक में, जो सोमवार से शुरू हो रही है, फरवरी में तय किए गए ढांचे के आधार पर अंतरिम समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा।


इस चार दिवसीय बैठक का नेतृत्व अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन इस वार्ता का संचालन करेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतरिम समझौते को कानूनी रूप से अंतिम रूप देना है। इसके साथ ही, दोनों पक्ष व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच और नॉन-टैरिफ मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


यह ध्यान देने योग्य है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के तहत एक अंतरिम समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दिया था। इसके अंतर्गत, अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा, रूसी तेल की खरीद के कारण भारतीय सामानों पर लगे 25% टैरिफ को हटाने का निर्णय लिया गया था। शेष 25% को घटाकर 18% करने की योजना थी। इसके बाद, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया।


हालांकि, ट्रंप ने इसके बाद दूसरे कानून के तहत 24 फरवरी से सभी देशों पर 10% का समान टैरिफ लगाने की घोषणा की। इस बड़े बदलाव के कारण फरवरी में होने वाली वार्ता टल गई थी। इसके बाद, अप्रैल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वाशिंगटन का दौरा किया, और अब अमेरिकी टीम भारत में बातचीत को आगे बढ़ाने आई है। इस बदले हुए माहौल में, दोनों देशों को इस समझौते पर फिर से चर्चा करनी होगी।