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भारत और इंडोनेशिया के बीच महत्वपूर्ण रक्षा समझौते

भारत और इंडोनेशिया के बीच हाल ही में हुए महत्वपूर्ण समझौतों में ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद शामिल है। पीएम मोदी के जकार्ता दौरे के दौरान, दोनों देशों ने कई अन्य रक्षा सहयोग पर भी हस्ताक्षर किए। इस समझौते से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि भारत की घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। पीएम मोदी ने शांति और कूटनीति के महत्व पर भी जोर दिया। जानें इस दौरे के दौरान और क्या महत्वपूर्ण बातें हुईं।
 

भारत-इंडोनेशिया के बीच समझौतों की श्रृंखला


इस समझौते से भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को मजबूती मिलेगी और देश की रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
पीएम मोदी ने मंगलवार को जकार्ता में अपने दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें ब्रह्मोस मिसाइल, इंडोनेशिया को ईवीएम बनाने में सहायता, और अन्य कई समझौतें शामिल हैं। इसके अलावा, यूपीआई सेवा भी जल्द ही इंडोनेशिया के भुगतान प्रणाली से जुड़ जाएगी।


भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट प्रदान करेगा। इसके साथ ही, इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा, इंडोनेशिया ने भारतीय एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी निर्णय लिया है। ये सभी समझौते पीएम मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान हुए।


भारत का शांति के प्रति समर्थन

पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति में बातचीत और कूटनीति की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने फिलिस्तीन के मुद्दे पर दो-राज्य समाधान और दीर्घकालिक शांति का समर्थन किया।


उन्होंने कहा कि हमारे दोनों देशों के लिए एक सुनहरा भविष्य आने वाला है, जिसमें साझा संस्कृति, आपसी विश्वास और समृद्धि का सपना है।


प्रांबानन मंदिर की यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वे बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता में प्रांबानन मंदिर जाएंगे। यह मंदिर एक हजार साल पुराना है और भारत-इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।


ब्रह्मोस मिसाइल की विशेषताएँ

ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, समुद्र और कुछ मामलों में हवाई प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। इसकी उच्च सटीकता और तेज गति के कारण कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई है। यह घोषणा पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान की गई है।


यह उनकी दक्षिण-पूर्व एशियाई देश की पहली यात्रा है, जिसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।