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भारत और जर्मनी के बीच नई साझेदारी: द्विपक्षीय शिखर वार्ता के प्रमुख बिंदु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच अहमदाबाद में हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता ने भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा दी है। इस बैठक में 20 संयुक्त घोषणाएं और 7 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और रक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदु और भविष्य की योजनाएं।
 

भारत-जर्मनी संबंधों में नई दिशा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच अहमदाबाद में आयोजित द्विपक्षीय शिखर वार्ता ने भारत और जर्मनी के संबंधों को एक नई दिशा दी है। दोनों देशों ने एक-दूसरे को पूरक साझेदार मानते हुए रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस बैठक में सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ग्रीन हाइड्रोजन, रक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।


संयुक्त घोषणाएं और समझौते

इस शिखर वार्ता के दौरान, भारत और जर्मनी ने 20 संयुक्त घोषणाओं और 7 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। चांसलर मर्ज की एशिया यात्रा की शुरुआत भारत से होना भी इस संबंध की महत्ता को दर्शाता है।


सुरक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र

बैठक में रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित और स्थिर वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करना है।


सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान

सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को भविष्य की आवश्यकता बताया गया। इन क्षेत्रों में साझेदारी से वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करने और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। दोनों देशों ने संयुक्त विकास और उत्पादन पर भी सहमति व्यक्त की।


ग्रीन हाइड्रोजन का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन में भारत और जर्मनी की कंपनियों का साझा मेगा प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। इसके साथ ही गैस, बायोइकोनॉमी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की गई है।


आर्थिक सहयोग और लोगों के बीच संपर्क

आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत-जर्मनी सीईओ फोरम बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा देने की घोषणा की, जिससे लोगों के बीच संपर्क और भी आसान होगा।


वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

यूक्रेन, ईरान और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने चर्चा की। जर्मनी ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।