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भारत और दक्षिण कोरिया के बीच नई साझेदारी: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली की महत्वपूर्ण बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। इस बैठक में जहाज निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के अन्य पहलुओं के बारे में।
 

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ली की बैठक


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अप्रैल को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक राष्ट्रपति ली की तीन दिवसीय भारत यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा थी। दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितता के संदर्भ में भारत और दक्षिण कोरिया के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। आइए जानते हैं कि इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई।


बैठक में चर्चा के प्रमुख मुद्दे

बैठक में जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, उभरती प्रौद्योगिकियों और जन-संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।


विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता मौजूदा वैश्विक घटनाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा सहयोग को और गहरा करना और नए क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ाना है।




2030 तक व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग आठ वर्षों बाद भारत आए हैं। दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाया जाए।


रविवार को दक्षिण कोरियाई समुदाय के साथ रात्रिभोज के दौरान, राष्ट्रपति ली ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग अभी भी काफी कम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाना आवश्यक है।


विदेश मंत्री जयशंकर का स्वागत

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति ली का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ली की विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता सराहनीय है।


दोनों नेताओं की बैठक से उम्मीद है कि भविष्य में व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है।