भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता
भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस एफटीए के तहत भारत के सभी निर्यात को न्यूजीलैंड में बिना किसी शुल्क के पहुंच प्रदान की जाएगी।
समझौते की पृष्ठभूमि
यह समझौता पिछले दिसंबर 2025 में दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद साइन किया गया है। इसमें 20 अध्याय शामिल हैं, जो सामान के व्यापार, विवादों के समाधान और कानूनी नियमों को सरल बनाने पर केंद्रित हैं।
पीयूष गोयल का बयान
FTA पर हस्ताक्षर के बाद, पीयूष गोयल ने कहा कि यह डील नौ महीने में पूरी हुई है। उन्होंने इसे 'हमारे देशों के बीच विश्वास और समान उम्मीदों' का प्रतीक बताया। गोयल ने कहा कि यह समझौता विकासशील देशों के साथ भारत के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 के विकसित भारत के दृष्टिकोण के करीब लाता है।
आर्थिक क्षेत्र में बढ़ावा
इस समझौते में सभी उत्पाद श्रेणियों को शामिल किया गया है, जिससे कपड़ा, चमड़ा, जूते, ज्वेलरी, और प्रोसेस्ड फूड जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी लाभ होगा।
भारतीय उत्पादों पर शुल्क में छूट
समझौते से पहले, न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क लगाता था, लेकिन अब यह शुल्क समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, भारत को कच्चे माल जैसे लकड़ी, कोकिंग कोयला और धातुओं पर भी ड्यूटी फ्री पहुंच मिलेगी।
भारत की पेशकश
भारत ने 70.03 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों पर रियायत देने की पेशकश की है, जबकि 29.97 प्रतिशत श्रेणियों को संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बाहर रखा गया है। इन संवेदनशील उत्पादों में दूध, कृषि उत्पाद, और अन्य पशु उत्पाद शामिल हैं।
भारत द्वारा शुल्क समाप्ति
भारत न्यूजीलैंड के लगभग 30 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों पर शुल्क समाप्त करेगा, जबकि अन्य 35.60 प्रतिशत श्रेणियों पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त किया जाएगा। न्यूजीलैंड के उत्पादों पर भी शुल्क में रियायत मिलेगी, जिसमें वाइन और दवाएं शामिल हैं।
निवेश की प्रतिबद्धता
समझौते में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को सुगम बनाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। यदि निवेश लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं, तो संतुलन स्थापित करने के लिए एक उपबंध जोड़ा गया है। 2024 में, दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2.4 अरब डॉलर रहा।