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भारत और पाकिस्तान ने नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया

भारत और पाकिस्तान ने हाल ही में एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह प्रक्रिया द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य कैदियों के अधिकारों की रक्षा करना है। भारत ने पाकिस्तान से भारतीय नागरिकों की रिहाई की अपील की है, जबकि पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में बंद नागरिकों की जानकारी साझा की है। जानें इस महत्वपूर्ण राजनयिक प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी।
 

नई दिल्ली में अदला-बदली


नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान ने गुरुवार को एक बार फिर से मानवीय और राजनयिक प्रक्रिया के तहत एक-दूसरे की जेलों में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में दी। यह प्रक्रिया नई दिल्ली और इस्लामाबाद में एक साथ राजनयिक माध्यमों से संपन्न हुई।


द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौता

यह प्रक्रिया 2008 में दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय कांसुलर एक्सेस समझौते के तहत की जाती है। इस समझौते के अनुसार, हर साल दो बार, एक जनवरी और एक जुलाई को, दोनों देश एक-दूसरे की हिरासत में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की जानकारी साझा करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैदियों को उनके अधिकार मिल सकें और उनकी स्थिति पर नजर रखी जा सके।


भारत द्वारा दी गई सूची

इस बार भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में बंद 391 नागरिक कैदियों और 33 मछुआरों की सूची सौंपी है, जो पाकिस्तानी नागरिक हैं या जिन्हें पाकिस्तानी माना जाता है। वहीं, पाकिस्तान ने भारत को अपनी हिरासत में बंद 58 नागरिक कैदियों और 199 मछुआरों की जानकारी दी है, जो भारतीय नागरिक हैं या जिन्हें भारतीय माना जा रहा है।


कैदियों की रिहाई की अपील

भारत सरकार ने इस अवसर पर पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि वह अपनी हिरासत में बंद भारतीय नागरिकों, मछुआरों, उनकी नावों और लापता भारतीय रक्षा कर्मियों की जल्द से जल्द रिहाई सुनिश्चित करे। इसके साथ ही भारत ने उन 167 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई में तेजी लाने की मांग की है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन अब तक स्वदेश नहीं लौट पाए हैं।


कांसुलर एक्सेस की मांग

इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तान से यह भी कहा है कि वह अपनी कस्टडी में रखे गए 35 ऐसे नागरिक कैदियों और मछुआरों को तुरंत कांसुलर एक्सेस दे, जिनके बारे में माना जाता है कि वे भारतीय हैं, लेकिन अभी तक भारतीय अधिकारियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक कैदियों की रिहाई नहीं होती, तब तक उनकी सुरक्षा, देखभाल और कल्याण की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है।


विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत सरकार के लगातार प्रयासों के चलते वर्ष 2014 से अब तक पाकिस्तान से 2,661 भारतीय मछुआरों और 71 नागरिक कैदियों को वापस लाया जा चुका है। इनमें वर्ष 2023 से अब तक लौटाए गए 500 मछुआरे और 13 नागरिक कैदी भी शामिल हैं।


इसी दिन भारत और पाकिस्तान ने एक और महत्वपूर्ण राजनयिक प्रक्रिया के तहत अपने-अपने परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की सूची का भी आदान-प्रदान किया। यह कदम दोनों देशों के बीच हुए उस समझौते के तहत उठाया गया है, जिसका मकसद एक-दूसरे के परमाणु ठिकानों पर किसी भी तरह के हमले को रोकना और पारदर्शिता बनाए रखना है। विदेश मंत्रालय ने इसे विश्वास निर्माण की दिशा में एक अहम कदम बताया है।