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भारत और पाकिस्तान ने परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान किया

भारत और पाकिस्तान ने 1 जनवरी को अपने परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान किया, जो 1992 से जारी है। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच परमाणु हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। इसके साथ ही, दोनों देशों ने हिरासत में मौजूद नागरिकों और मछुआरों की सूची भी साझा की। जानें इस महत्वपूर्ण आदान-प्रदान के पीछे का कारण और इसके प्रभाव।
 

भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु ठिकानों की सूची का आदान-प्रदान


पहली बार 1 जनवरी 1992 को हुआ था लिस्ट का पहला आदान-प्रदान
भारत और पाकिस्तान ने नए साल के पहले दिन एक-दूसरे के साथ अपने न्यूक्लियर ठिकानों की सूची साझा की। यह प्रक्रिया 1992 से जारी है। दोनों देशों ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यमों से यह जानकारी साझा की। ये ठिकाने वे हैं, जहां दोनों देशों के परमाणु हथियार रखे जाते हैं।


यह सूची भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध संबंधी समझौते के तहत आती है, जिसे 31 दिसंबर 1988 को हस्ताक्षरित किया गया था। इस समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों देश इन ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे।


हर वर्ष 1 जनवरी को होती है सूची का आदान-प्रदान

समझौता 27 जनवरी 1991 से प्रभावी हुआ। इसके अनुसार, भारत और पाकिस्तान हर साल 1 जनवरी को एक-दूसरे को अपने परमाणु ठिकानों की जानकारी देते हैं। पहली बार यह सूची 1 जनवरी 1992 को साझा की गई थी। यह आदान-प्रदान ऐसे समय में हुआ है जब मई 2025 में पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इसी दौरान पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने किराना हिल्स पर ड्रोन गिरने का दावा किया गया था।


भारत के पास 180 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास 180 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं। ये आंकड़े सीपरी की 2025 के वर्ल्ड न्यूक्लियर फोर्सेस डेटा पर आधारित हैं, जिसमें दोनों देशों के हथियारों की संख्या स्टॉकपाइल के रूप में दी गई है।


कैदियों और पकड़े गए मछुआरों की सूची भी साझा की गई

भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची भी साझा की। भारत ने अपनी हिरासत में 391 नागरिक कैदियों और 33 मछुआरों की जानकारी दी है, जो पाकिस्तानी हैं या जिनके पाकिस्तानी होने का संदेह है। इसी प्रकार, पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में 58 नागरिक कैदियों और 199 मछुआरों की जानकारी साझा की है, जो भारतीय हैं या जिनके भारतीय होने का संदेह है।