भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस: समुद्री संसाधनों की खोज में नया मोड़
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन
भारत आज अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमें हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश अभी भी कच्चे तेल के मामले में काफी हद तक निर्भर है। उन्होंने बताया कि पुरानी सोच के कारण समुद्री क्षेत्र का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा 'नो गो एरिया' घोषित कर दिया गया था, जिससे समुद्र के अंदर तेल और गैस की खोज नहीं हो पाई।
नई नीति का आगाज़
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'अब सरकार ने इस सोच को बदल दिया है और उन क्षेत्रों को 'गो अहेड एरिया' के रूप में खोल दिया है। इसके तहत समुद्र में नए भंडारों की खोज का कार्य तेज किया जा रहा है। हाल ही में समुद्र मंथन योजना की घोषणा की गई है, जिसके लिए 85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।'
सोच की सीमाएं
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'कई बार देश की प्रगति संसाधनों की कमी के कारण नहीं, बल्कि सोच की सीमाओं के कारण रुकती है। जब हमारी सोच सीमित हो जाती है, तब हम अपने सामर्थ्य को भी पहचान नहीं पाते हैं।'
समुद्री तटों का 'नो गो एरिया' घोषित करना
रक्षा मंत्रालय ने पहले पर्यावरणीय कारणों से समुद्री तटों के लगभग 99 प्रतिशत हिस्से को अन्वेषण के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था। यह निर्णय मोनाजाइट खनिज की उपस्थिति के कारण लिया गया था, जो परमाणु खनिज माना जाता है।
नीति में बदलाव
पहले निजी कंपनियों को केवल उन्हीं तटीय क्षेत्रों में खनन की अनुमति थी, जहां मोनाजाइट की सांद्रता कम थी। 2016 में किए गए संशोधन ने इस सीमा को और कड़ा कर दिया। लेकिन फरवरी 2019 में खान मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी की, जिससे मोनाजाइट की सीमा को शून्य कर दिया गया।
समुद्र मंथन योजना का महत्व
केंद्रीय कैबिनेट ने जुलाई 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय की 'समुद्र मंथन योजना' को मंजूरी दी। इस योजना के तहत लगभग 84,084 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है।
नए क्षेत्रों की खोज
समुद्र मंथन योजना का उद्देश्य गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना है। यह प्रक्रिया महंगी और जोखिम भरी होती है, लेकिन सरकार जोखिम कम करने के लिए सहायता प्रदान करेगी।
खर्च का विवरण
इस योजना के तहत चार हिस्सों में पैसे का उपयोग किया जाएगा। सबसे अधिक 43,200 करोड़ रुपये 60 गहरे समुद्री कुओं की खुदाई के लिए रखे गए हैं।
संभावित क्षेत्रों की पहचान
कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी और अंडमान जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं हैं। यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो देश का घरेलू तेल-गैस उत्पादन सालाना 62 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 80 मिलियन मीट्रिक टन हो सकता है।