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भारत का अंतरिक्ष मिशन: 2030 तक हर साल 50 प्रक्षेपण का लक्ष्य

भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 2030 तक हर साल 50 प्रक्षेपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका ने बताया कि इस योजना के तहत भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर से बढ़कर 45 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। पिछले पांच वर्षों में 450 से अधिक स्टार्टअप्स ने इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। जानें कैसे भारत वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
 

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नई ऊँचाइयाँ

नई दिल्ली: भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महाशक्ति बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के अध्यक्ष पवन के गोयनका ने रविवार को बताया कि भारत ने 2030 तक हर वर्ष 50 अंतरिक्ष प्रक्षेपण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की उन्नत तकनीक और तेजी से बढ़ते निजी स्पेस स्टार्टअप्स की भागीदारी से भारत वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।


पांच वर्षों में 450 से अधिक स्टार्टअप्स की सफलता

पवन गोयनका ने बताया कि जब भारत ने पांच साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला था, तब इसका मुख्य उद्देश्य ISRO को गहन वैज्ञानिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देना और निजी क्षेत्र को व्यावसायिक अवसर प्रदान करना था। 2014 में केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, जबकि अब यह संख्या 450 से अधिक हो गई है। भारतीय निजी कंपनियां अब केवल प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सफलतापूर्वक रॉकेट को कक्षा में भेजकर अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन कर चुकी हैं।


स्पेस इकोनॉमी में अभूतपूर्व वृद्धि

वर्तमान में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 9 अरब डॉलर की है, जो अगले दशक में 40 से 45 अरब डॉलर (लगभग 3.75 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँचने का अनुमान है। इस क्षेत्र में निजी निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है; 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ था, जो मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल और दिगांतारा जैसी कंपनियाँ लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट निर्माण और अर्थ ऑब्जर्वेशन में नए मानक स्थापित कर रही हैं।


भारत में निर्माण, भारत से लॉन्च

गोयनका ने कहा कि 50 वार्षिक लॉन्च के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निजी उद्योगों को बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता विकसित करनी होगी। ISRO नई वैज्ञानिक सीमाओं को पार करेगा, जबकि निजी क्षेत्र उन तकनीकों का व्यावसायीकरण करेगा। हाल ही में ISRO ने जीएसएलवी-एफ17 के माध्यम से भारत के सबसे भारी (2,367 किग्रा) और भू-समकालिक कक्षा में स्थापित होने वाले पहले अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-05 का सफल प्रक्षेपण किया है। गोयनका ने कहा, “भारत में निर्माण करो, भारत से लॉन्च करो और पूरी दुनिया को सेवाएं दो।”