भारत की BRICS अध्यक्षता: एक नई चुनौती और अवसर
भारत की BRICS अध्यक्षता का सफर
नई दिल्ली: BRICS जैसे महत्वपूर्ण मंच की अध्यक्षता केवल मेज़बानी की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि यह वैश्विक चुनौतियों के बीच अपने दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने का एक अवसर भी है। भारत ने अब तक चार बार BRICS की अध्यक्षता की है, जो 2012 से शुरू होकर 2026 तक पहुंची है। हर बार, भारत ने बदलती परिस्थितियों के अनुसार मंच का एजेंडा निर्धारित किया है।
2012: आर्थिक संकट के बीच विकास पर ध्यान
भारत ने पहली बार 2012 में BRICS की अध्यक्षता की। 29 मार्च को नई दिल्ली में चौथा BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसका विषय वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझेदारी था। उस समय, दुनिया 2008-09 के आर्थिक संकट से उबर रही थी। भारत ने BRICS को केवल आर्थिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे मुद्दों को भी शामिल किया।
2016: विकास के साथ आतंकवाद और सुरक्षा पर ध्यान
चार साल बाद, 2016 में भारत ने दूसरी बार BRICS की अध्यक्षता की। 15-16 अक्टूबर को गोवा में आठवां BRICS शिखर सम्मेलन हुआ। इस बार, जवाबदेही, समावेशिता और सामूहिक समाधान पर जोर दिया गया। भारत ने विकास के साथ आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी प्राथमिकता दी। ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, सतत विकास और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
2021: स्वास्थ्य और तकनीक पर जोर
2021 में, भारत ने तीसरी बार BRICS की अध्यक्षता की। 9 सितंबर को 13वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। यह वह समय था जब कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया। इस दौरान, भारत ने डिजिटल स्वास्थ्य, अंतरिक्ष तकनीक और बहुपक्षीय सुधार पर ध्यान केंद्रित किया। BRICS देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और साझा सहमति बनाने के प्रयास किए गए।
2026: नई जिम्मेदारियों के साथ BRICS की अध्यक्षता
अब, 2026 में, भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार की चुनौतियाँ पहले से भिन्न हैं, क्योंकि BRICS का दायरा बढ़ा है और वैश्विक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। भारत के सामने नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मंच को अधिक प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी है। ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।