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भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में सुधार

हाल ही में जारी जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है, जिससे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही है। 2024-25 में सकल बचत में भी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18% की वृद्धि हुई है, जो विदेशी निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। जानें और क्या-क्या बदलाव आए हैं और भविष्य में क्या उम्मीदें हैं।
 

जीडीपी के नवीनतम आंकड़ों से स्पष्टता


वर्तमान आर्थिक स्थिति


हाल ही में जारी जीडीपी के संशोधित आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत की अर्थव्यवस्था न केवल मजबूत हो रही है, बल्कि इसका लाभ आम जनता तक भी पहुँच रहा है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 1,92,774 रुपये आंकी गई है।


देश की कुल शुद्ध राष्ट्रीय आय 271.44 लाख करोड़ रुपये है। पिछले वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 1,59,557 रुपये थी, जबकि 2023-24 में यह 1,76,465 रुपये रहने का अनुमान है। बचत के मामले में, 2024-25 में सकल बचत 111.13 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जिसमें घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी 62.1% और गैर-वित्तीय निगमों की 28.9% है।


वास्तविक जीडीपी का अनुमान

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी का अनुमान


वास्तविक जीडीपी, जिसे स्थिर कीमतों पर मापा जाता है, का स्तर वित्त वर्ष 2025-26 में 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 2024-25 के लिए जीडीपी का पहला संशोधित अनुमान 299.89 लाख करोड़ रुपये था। बचत में सुधार के कारण घरेलू संसाधनों का आधार मजबूत हुआ है, जिससे निवेश और पूंजी निर्माण में वृद्धि की संभावना है।


जीवीए में वृद्धि के कारण

विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि


वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में वृद्धि 2024-25 में मुख्यतः विनिर्माण, खनन, निर्माण, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व और व्यावसायिक सेवाओं के कारण हुई है। वर्तमान कीमतों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) का अनुमान 2024-25 के लिए 33.95 लाख करोड़ रुपये है, जबकि 2023-24 में यह 30.74 लाख करोड़ रुपये था।


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि

वैश्विक चुनौतियों के बीच निवेश में वृद्धि


वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-दिसंबर अवधि में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 18% की वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 47.87 अरब डॉलर का एफडीआई प्रवाह हुआ, जो सालाना आधार पर 18% की वृद्धि को दर्शाता है।