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भारत की आजादी: अजीत डोभाल का युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवाओं को भारत की आजादी के महत्व और उनके योगदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अनगिनत बलिदानों का परिणाम है। डोभाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास से सीखें और देश के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनका यह संदेश विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के उद्घाटन समारोह में दिया गया, जिसमें 2000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं। जानें उनके विचार और प्रेरणादायक संदेश के बारे में।
 

भारत की स्वतंत्रता का महत्व


नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कहा कि भारत की स्वतंत्रता कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अनगिनत बलिदानों और कठिनाइयों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के लिए कई पीढ़ियों ने अपमान, हिंसा, विनाश और असहनीय पीड़ा का सामना किया। डोभाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उससे प्रेरणा लेकर देश के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।


डोभाल का संदेश

अजीत डोभाल ने क्या कहा?


उन्होंने 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि आज का स्वतंत्र भारत हमेशा ऐसा नहीं था। हमारे पूर्वजों ने इस आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। हमारी सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाया गया और धार्मिक स्थलों को लूटा गया। उस समय लोग खुद को असहाय महसूस करते थे और सब कुछ होते हुए देखते रहे।


पीड़ा को शक्ति में बदलना

पीड़ा को एक शक्ति में बदलना जरूरी


डोभाल ने कहा कि यह इतिहास आज के युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। हर युवा के भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने की जिजीविषा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'बदला' शब्द शायद सही न लगे, लेकिन हमें अपने अतीत से मिली पीड़ा को एक शक्ति में बदलना आवश्यक है। उनका कहना था कि हमें अपने अतीत से सीख लेकर भारत को फिर से उस ऊंचाई पर ले जाना है, जहां हम अपने मूल्यों, विचारों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक मजबूत और महान राष्ट्र का निर्माण कर सकें।


भारत की प्राचीन सभ्यता

डोभाल की चेतावनी


डोभाल ने भारत की प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सभ्यता अत्यंत उन्नत और शांतिपूर्ण थी। उन्होंने बताया कि भारत ने कभी दूसरों के मंदिर नहीं तोड़े और न ही लूटपाट के लिए किसी देश पर हमला किया। जब दुनिया के कई हिस्से पिछड़े हुए थे, तब भी भारत ज्ञान, संस्कृति और शांति का केंद्र था। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अतीत में हमने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई, जिसका हमें भारी नुकसान उठाना पड़ा।


भविष्य की पीढ़ियों के लिए संदेश

देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी


डोभाल ने युवाओं से सवाल किया कि क्या हमने इतिहास से मिले सबकों को सच में सीखा है? क्या हम उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा पाएंगे? उनका कहना था कि अगर भविष्य की पीढ़ियां इन अनुभवों को भूल गईं, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।


कार्यक्रम का महत्व

कार्यक्रम में भागीदारी


यह संबोधन विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD 2026) के उद्घाटन अवसर पर दिया गया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 9 से 12 जनवरी तक भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है। युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित इस पहल में देशभर से 2000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं। यहां युवा विभिन्न विषयों पर चर्चा, नवाचार और विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना है।