भारत की आतंकवाद विरोधी नीति: एक नई दृष्टि
भारत सरकार की आतंकवाद विरोधी रणनीति
भारत सरकार ने अपने आतंकवाद विरोधी रणनीति पत्र में यह स्पष्ट किया है कि कुछ राष्ट्र आतंकवाद का उपयोग अपनी राजकीय नीतियों में कर रहे हैं। हालांकि, भारत का मानना है कि आतंकवाद किसी विशेष धर्म, नस्ल, राष्ट्रीयता, या संस्कृति से नहीं जुड़ा है।
यह सराहनीय है कि भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति और रणनीति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं, जिन पर सही तरीके से अमल करने पर भारत आतंकवाद को प्रभावी ढंग से परास्त कर सकता है। केंद्र ने आतंकवाद के प्रति अपनी शून्य सहनशीलता नीति को कई समावेशी सिद्धांतों पर आधारित किया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 'पड़ोसी क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण कई स्थान ऐसे बन गए हैं, जहां शासन स्थापित करना कठिन हो गया है। इसके अलावा, कुछ देशों ने आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति के रूप में अपनाया है।'
फिर भी, भारत का मानना है कि आतंकवाद किसी विशेष धर्म, नस्ल, राष्ट्रीयता या संस्कृति से संबंधित नहीं है। सरकार ने अपनी सात सूत्री रणनीति को 'प्रहार' नाम दिया है। इसके चौथे सूत्र के अनुसार, आतंकवाद के खतरों से निपटने की प्रक्रियाएं मानव अधिकारों और कानून के राज के सिद्धांतों पर आधारित होंगी। ये बातें अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। केंद्र ने यह भी बताया है कि आतंकवादी समूह लगातार भारतीय युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियां और पुलिस तंत्र इसे विफल कर रहे हैं।
युवाओं के उग्रवादी बनने के कारणों का उल्लेख करते हुए, उन्हें दूर करने के उपायों पर जोर दिया गया है। इसमें युवाओं के प्रशिक्षण और संवाद के साथ-साथ कमजोर वर्गों में गरीबी और बेरोजगारी की समस्याओं को हल करने के उपायों की चर्चा भी शामिल है।
ये सभी बिंदु आतंकवाद के प्रति भारत की पारंपरिक समझ का हिस्सा रहे हैं। यह सकारात्मक है कि वर्तमान सरकार ने भी इनकी महत्ता को समझा और इन्हें स्पष्ट रूप से दोहराया है। अब यह आवश्यक है कि केंद्र और राज्य सरकारें तथा उनकी एजेंसियां इस दृष्टिकोण को व्यवहार में भी अपनाएं। हाल के वर्षों में कई बार यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई है, जब आतंकवाद की गंभीर समस्या का उपयोग सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए किया गया। इससे देश में इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर मत-विभाजन की स्थिति बनी। इसलिए यह आवश्यक है कि जो समझ नीति पत्र में प्रदर्शित हुई है, सरकारें उसके अनुसार कार्य करें।