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भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर युद्ध का प्रभाव: होर्मुज में फंसे जहाज

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें LPG और कच्चा तेल शामिल है। भारत सरकार ने इन जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए कूटनीतिक प्रयास किए हैं। हाल ही में कुछ जहाज सुरक्षित रूप से निकले हैं, जबकि ईरान के साथ बातचीत की स्थिति पर भी चर्चा हो रही है। जानें इस संकट के बारे में और अधिक जानकारी।
 

भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर युद्ध का असर


पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अस्थिर जल क्षेत्र में लगभग 3 लाख मीट्रिक टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस फंसी हुई है। मंगलवार को भारत सरकार ने इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए इन जहाजों की सुरक्षित निकासी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।


होर्मुज में फंसे भारतीय जहाजों की संख्या

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वर्तमान में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं। इनमें 6 बड़े LPG कैरियर, 1 LNG टैंकर, 4 कच्चा तेल टैंकर, 1 केमिकल कैरियर, 3 कंटेनर और 2 बल्क कैरियर शामिल हैं।


सिन्हा ने यह भी बताया कि एक वेरी लार्ज गैस कैरियर की क्षमता लगभग 45,000 मीट्रिक टन होती है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 6 जहाजों में भारत की 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक LPG फंसी हुई है।


कूटनीतिक प्रयासों से राहत

इस संकट के बीच कूटनीतिक प्रयासों से राहत मिली है। 14 मार्च को दो बड़े भारतीय LPG टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। ये दोनों टैंकर भारत के लिए 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आए हैं। इसके अलावा, क्रूड ऑयल टैंकर जग लाड़की भी 81,000 मीट्रिक टन तेल के साथ यूएई के फुजैराह से सुरक्षित रूप से भारत की ओर रवाना हो चुका है।


ईरान के साथ बातचीत की स्थिति

हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान के साथ जब्त किए गए जहाजों की अदला-बदली पर बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान के साथ ऐसी कोई सौदेबाजी नहीं हो रही है। हालांकि, उन्होंने यह कहा कि फंसे हुए जहाजों की सुरक्षित निकासी और मानवीय सहायता के मुद्दे पर ईरान और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है।