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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पीएम मोदी का बयान: 41 देशों से तेल आयात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर चर्चा की और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने 27 से 41 देशों से तेल आयात बढ़ाया है, जिससे सप्लाई में कोई रुकावट न आए। पीएम ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और 3.75 लाख भारतीयों की सुरक्षित वापसी की जानकारी दी। जानें उनके संबोधन की मुख्य बातें और सरकार की रणनीतियाँ।
 

पश्चिम एशिया में तनाव पर पीएम मोदी का बयान

नई दिल्ली। सोमवार को लोकसभा में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति चिंताजनक है, लेकिन भारत सरकार पूरी तरह से तैयार है ताकि देश में किसी भी प्रकार का संकट उत्पन्न न हो। पीएम मोदी ने बताया कि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले जहां भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, अब इसे बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिया गया है, जिससे सप्लाई में कोई रुकावट न आए। उन्होंने कहा कि यह संकट तीन हफ्तों से अधिक समय से चल रहा है और पूरी दुनिया इसके शांतिपूर्ण समाधान की अपील कर रही है। पीएम ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से लौटे हजारों लोग और 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं।


पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:


तेल-गैस और ऊर्जा पर:
सरकार 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के रिजर्व पर काम कर रही है। विभिन्न देशों के सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सप्लाई जारी रहे। तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़े जहाजों की सुरक्षित भारत पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जा रहा है।


कृषि और खाद्य सुरक्षा:
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पर्याप्त खाद्य भंडार है और आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं। किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है और 6 नए यूरिया प्लांट स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, 'मेड इन इंडिया' नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि संकट का कृषि पर प्रभाव न पड़े।


बिजली आपूर्ति पर:
गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार सतर्क है। सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक मौजूद है और उत्पादन से लेकर सप्लाई तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।


ऊर्जा क्षेत्र की रणनीति:
सरकार ने एक विशेष समूह का गठन किया है, जो रोजाना बैठक कर आयात-निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का समाधान कर रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर इस संकट का प्रभाव कम हो सके।


भारत का रुख:
पीएम मोदी ने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कमर्शियल जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।


प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद से एकजुट संदेश भेजना आवश्यक है, ताकि वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत और संतुलित भूमिका प्रदर्शित हो सके।