भारत की कूटनीतिक सक्रियता: खाड़ी देशों में तनाव के बीच पीएम मोदी की पहल
भारत की कूटनीतिक सक्रियता
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते संकट और तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से खाड़ी देशों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया है। यूएई के बाद, उन्होंने बहरीन के राजा और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर बातचीत की। इन वार्ताओं में, पीएम मोदी ने संकट के समय में मित्र देशों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और हाल के हिंसक हमलों की कड़ी निंदा की।
बहरीन के राजा से चर्चा
प्रधानमंत्री ने बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत में बहरीन पर हुए हमलों को लेकर भारत ने गहरी चिंता जताई। मोदी ने स्पष्ट किया कि शांति ही एकमात्र समाधान है और तनाव कम करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इस वार्ता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बहरीन में रह रहे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा पर केंद्रित रहा। भारत सरकार वहां के प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय कर रही है।
सऊदी अरब से शांति की अपील
इसके अलावा, पीएम मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद से भी संपर्क किया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए गंभीर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब की सुरक्षा को निशाना बनाने वाले हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि खाड़ी क्षेत्र में शांति का माहौल बनाए रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। भारत इस दिशा में पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार है।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय अपनी आजीविका के लिए निवास करते हैं, विशेषकर बहरीन में भारतीय कामगारों की संख्या काफी अधिक है। युद्ध जैसे हालातों के बीच, सरकार का प्राथमिक उद्देश्य इन नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित नेताओं से आश्वासन लिया है कि संकट के समय में भारतीय समुदाय की भलाई का पूरा ध्यान रखा जाएगा। विदेश मंत्रालय भी वहां की बदलती परिस्थितियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रख रहा है।
हमलों की कड़ी निंदा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत के दौरान कूटनीतिक शिष्टाचार से इतर कड़ा रुख अपनाते हुए हमलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। संकट की इस घड़ी में भारत अपने रणनीतिक और मित्र देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। भारत की यह प्रतिबद्धता वैश्विक मंच पर उसके बढ़ते प्रभाव और क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति उसकी संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।
भारत हमेशा से विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने और शांति का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री का यह ताजा कूटनीतिक प्रयास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि वह विश्व शांति के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। खाड़ी देशों में स्थिरता वापस लाने के लिए भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निरंतर सार्थक संवाद कर रहा है।