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भारत की चाबहार पोर्ट योजना: अमेरिका से छूट की स्थिति

भारत की चाबहार पोर्ट परियोजना एक बार फिर चर्चा में है, खासकर अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों से छूट की समय-सीमा के नजदीक आने के कारण। भारत सरकार इस छूट को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है। चाबहार पोर्ट का महत्व केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए भी अत्यधिक है। जानें कि यह पोर्ट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और भविष्य में क्या संभावनाएं हैं।
 

चाबहार पोर्ट पर भारत की रणनीति


भारत की चाबहार पोर्ट परियोजना एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों से छूट की समय-सीमा के नजदीक आने के कारण भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। भारत की इच्छा है कि यह छूट आगे भी बनी रहे, ताकि चाबहार पोर्ट पर विकास कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।


छूट की समाप्ति की तारीख

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई मौजूदा छूट 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। इस छूट के तहत भारत ईरान के चाबहार पोर्ट के विकास और संचालन में अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित हुए बिना शामिल रह सकता है।


भारत सरकार की स्थिति

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत मौजूदा व्यवस्था के तहत अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। सरकार का मानना है कि चाबहार पोर्ट केवल एक व्यापारिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


चाबहार पोर्ट का महत्व

चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्व में ओमान की खाड़ी के निकट स्थित है। यह पोर्ट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। इसके माध्यम से भारत पाकिस्तान को बाइपास करते हुए मध्य पूर्व और अफगानिस्तान में अपने व्यापार को बढ़ावा दे सकता है।


लंबी अवधि का समझौता

भारत और ईरान के बीच 2024 में 10 साल का समझौता हुआ था, जिससे चाबहार में भारत की भूमिका स्थायी हो गई। इससे पहले भारत को बार-बार छोटी अवधि की छूट पर निर्भर रहना पड़ता था।


अंतरराष्ट्रीय रुचि

चाबहार पोर्ट अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। उज्बेकिस्तान जैसे देश भी इसे वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में देख रहे हैं। यह पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है।


भविष्य की संभावनाएं

अब सभी की नजर इस बात पर है कि अमेरिका छूट को आगे बढ़ाता है या नहीं। इसका प्रभाव भारत की विदेश नीति, व्यापार और ईरान-अमेरिका के संबंधों पर सीधे पड़ेगा।