भारत की नई रक्षा नीति: समय पर हथियार खरीद सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम
सुरक्षा रणनीति में बदलाव की आवश्यकता
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सुरक्षा नीति में सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है। पाकिस्तान को जवाब देने के बाद, यह संभावना है कि वह किसी भी समय पलटवार कर सकता है। इसके साथ ही, चीन जैसे पड़ोसी देशों के कारण भारत को अपनी रक्षा तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस संदर्भ में, भारत ने हथियारों की खरीद नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
हथियार खरीद नीति में बदलाव
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इमर्जेंसी क्लॉज के तहत हथियारों की खरीद से संबंधित नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी सौदे की डिलीवरी एक वर्ष के भीतर पूरी नहीं होती है, तो सरकार उस डील को रद्द करने का अधिकार रखती है। सिंह ने कहा कि इससे आपूर्तिकर्ता कंपनियों पर दबाव पड़ेगा कि वे समय पर अपने वादे पूरे करें।
इस कदम का उद्देश्य भारत की सुरक्षा और तैयारी को सुनिश्चित करना है, ताकि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अप्रत्याशित सैन्य घटनाक्रम में भारतीय सेनाओं के पास पूरी क्षमता से लैस उपकरण मौजूद हों।
एस-400 डिफेंस सिस्टम की स्थिति
रक्षा सचिव ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के संदर्भ में भी जानकारी दी। भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच स्क्वाड्रन के लिए यह सौदा किया था, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण अब तक केवल तीन स्क्वाड्रन ही भारत को प्राप्त हुए हैं। भारत को शेष दो स्क्वाड्रन की भी आवश्यकता है ताकि सीमा सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सके।
सिंह ने कहा कि यह सौदा इमर्जेंसी क्लॉज के अंतर्गत नहीं आता, इसलिए इसे रद्द करने का कोई सवाल नहीं है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। पुतिन 5 दिसंबर को भारत आ रहे हैं और उनके दौरे में कई महत्वपूर्ण समझौतों की संभावना है।
कड़ी नीति की आवश्यकता
रक्षा सचिव ने बताया कि इमर्जेंसी हथियारों की खरीद में कड़े नियम इसलिए लागू किए गए हैं क्योंकि चीन के साथ एलओसी पर तनाव के दौरान कई आपातकालीन हथियार सौदे किए गए थे, जिनकी डिलीवरी अब तक नहीं हुई। ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीनों सेनाओं को अपने बजट का 15% इमरजेंसी खरीद में खर्च करने की मंजूरी दी गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि हथियारों की डिलीवरी में देरी केवल देसी कंपनियों की गलती नहीं है। रूस, इजरायल और अमेरिकी कंपनियों की आपूर्ति में भी देरी हुई है। उदाहरण के लिए, रूस के एस-400, इजरायल से हथियार और अमेरिकी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के एफ404 इंजन, जो तेजस एमके1ए फाइटर जेट में इस्तेमाल होने हैं, की डिलीवरी में देरी हुई है।