भारत की नरम नीति: आतंकवादियों की रिहाई पर सवाल उठते हैं
भारत की सामरिक स्थिति पर विचार
एक प्रमुख सामरिक विश्लेषक ने भारत को 'चिरंतन नरम देश' के रूप में वर्णित किया है। पंडित नेहरू के समय से भारत को इस श्रेणी में रखा गया है। भारत की नीतियों में कभी भी आक्रामकता नहीं रही है, और इसे अपने गौरवमयी इतिहास में देखा जा सकता है कि भारत ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। हालांकि, यह केवल आक्रमण न करने की बात नहीं है; भारत की विदेश और सामरिक नीतियों के कारण इसे नरम देश माना जाता है। यह बात एक बार फिर साबित हुई जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवादियों को सहायता और प्रशिक्षण देने वाले सात आतंकियों को जेल से रिहा कर दिया।
इनमें से एक मैथ्यू वैन डाइक है, जो एक अमेरिकी नागरिक है और लीबिया के गृह युद्ध से लेकर यूक्रेन में चल रही लड़ाई तक में भाड़े के सैनिक के रूप में कार्य कर चुका है। उसके साथ छह अन्य यूक्रेनी नागरिक भी थे, जो भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए थे। ये लोग पहले भी भारत आ चुके थे और पूर्वोत्तर के रास्ते म्यांमार की सीमा में जाकर आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण देते थे। इस बार भी वे इसी उद्देश्य से गए थे, लेकिन रूस ने भारत को चेतावनी दी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, ये लोग छह महीने से भी कम समय जेल में रहे। उन्हें न केवल जमानत मिली, बल्कि अपने देश लौटने की अनुमति भी दी गई।
एनआईए ने इन पर यूएपीए के तहत आरोप लगाए थे, जबकि कई अन्य लोग इसी कानून के तहत वर्षों से जेल में हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि ये लोग एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं, जो भारत में ड्रोन सप्लाई कर रहा है। लेकिन एक दिन अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मैथ्यू वैन डाइक का मामला उठाया, और इसके बाद भारत ने यूएपीए के आरोप हटा दिए और सभी को रिहा कर दिया। अब यह कहा जा रहा है कि उन्हें एक महीने में भारत लौटना होगा, लेकिन सच्चाई सबको पता है। भोपाल गैस कांड से लेकर पुरुलिया हथियार कांड तक के आरोपियों के भारत से भागने की घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत बाहरी दबाव में झुकता है।