भारत की पश्चिम एशिया में सक्रियता: खाड़ी देशों से संपर्क बढ़ा रहा है
भारत की नजर पश्चिम एशिया पर
नई दिल्ली - भारत पश्चिम एशिया के तेजी से बदलते हालात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में इस पर प्रकाश डाला।
जायसवाल ने कहा कि भारत की नजर क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 11 से 12 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात का दौरा करेंगे, जहां वे दोनों देशों के बीच सहयोग की समीक्षा करेंगे और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। यह साझेदारी न केवल आर्थिक और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अलावा, भारत की उच्चस्तरीय वार्ता खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी जारी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 और 10 अप्रैल 2026 को कतर का दौरा करेंगे, जो ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और आपसी हितों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश टी. एल. ने दवाओं की कीमतों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण फार्मा इनपुट्स की कई वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई थीं, लेकिन दवाओं की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है। 40 विभिन्न पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटाकर शून्य कर दी गई है। एलपीजी और एचएसडी की आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और वर्तमान में किसी प्रकार की बाधा नहीं है। सरकार उद्योग के साथ समन्वय में लगातार मुद्दों का समाधान कर रही है, ताकि दवा उत्पादन में कोई रुकावट न आए।