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भारत की रणनीतिक जीत: ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की हवाई शक्ति को कैसे कमजोर किया?

अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत की रणनीतिक जीत की सराहना की है। उन्होंने बताया कि भारत ने 72 घंटे में पाकिस्तान की हवाई रक्षा को नष्ट कर दिया। इस लेख में जानें कि कैसे भारत ने अपनी योजनाओं और तकनीकों का उपयोग कर हवाई क्षेत्र में पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया। स्पेंसर ने इस ऑपरेशन के दौरान भारत की रणनीति और पाकिस्तान की कमजोरियों पर भी प्रकाश डाला है।
 

भारत की हवाई श्रेष्ठता का जश्न

नई दिल्ली: अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत की रणनीतिक सफलता की सराहना की है। उनका कहना है कि भारत ने केवल 72 घंटों में पाकिस्तान की हवाई रक्षा को नष्ट कर दिया और हवाई क्षेत्र में पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया।


स्पेंसर का महत्वपूर्ण खुलासा

जॉन स्पेंसर, जो कि अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर और युद्ध अध्ययन के विशेषज्ञ हैं, ने बताया कि यह जीत एक ही हमले का परिणाम नहीं थी, बल्कि कई दिनों की सावधानीपूर्वक योजना का नतीजा थी। मई 2025 में, भारत ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए। जब पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, तो भारत ने भी मजबूती से जवाब दिया।


भारत की कुशल रणनीति

8 मई को, भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा प्रणालियों पर लक्षित हमले किए। चूनियां और पासरूर में अर्ली वार्निंग रडार और HQ-9 मिसाइल बैटरी को निशाना बनाया गया। ये हमले मुख्य रूप से लॉइटरिंग मुनिशन (ड्रोन) से किए गए, जिससे पाकिस्तान के रडार और मिसाइल सिस्टम पर लगातार दबाव बना रहा। इससे पाकिस्तान की निगरानी, कमांड और प्रतिक्रिया क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई।


S-400 का प्रभाव

स्पेंसर के अनुसार, भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी उच्च मूल्य वाले एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को 300 किलोमीटर दूर से निशाना बनाया। इससे पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र बहुत सीमित हो गया, और उन्हें हर कदम पर सतर्क रहना पड़ा।

भारत ने अपनी स्वदेशी एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम IACCCS और आकाश मिसाइल का भी प्रभावी उपयोग किया, जिसने पाकिस्तान के सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल कर दिया।


आधुनिक युद्ध की सीख

स्पेंसर ने यह भी कहा कि आज के युद्ध में केवल लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सिस्टम महत्वपूर्ण होता है। भारत के पास बेहतर योजना, गहराई और स्वदेशी तकनीक का एक मजबूत एकीकरण था।

वहीं, पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से प्राप्त हथियारों पर निर्भर रहा, जो प्रारंभ में कुछ सफलता दिला सके, लेकिन बाद में नाकाफी साबित हुए। 10 मई को पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम हुआ, लेकिन तब तक भारत हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह से हावी हो चुका था।