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भारत की सक्रियता: होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी

भारत ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया, जिसमें विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने देश का प्रतिनिधित्व किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य ईरान द्वारा अवरुद्ध जलमार्ग से सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना था। भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया, जबकि अमेरिका की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी। जानें इस जलमार्ग का भारत की ऊर्जा जरूरतों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
 

भारत की भूमिका और होर्मुज जलडमरूमध्य


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव के बीच, भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सक्रियता को प्रदर्शित किया है। हाल ही में, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन की पहल पर आयोजित एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक में लगभग 30 देशों ने भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान द्वारा आंशिक रूप से अवरुद्ध होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित समुद्री आवाजाही को सुनिश्चित करना था। यह जलमार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


विक्रम मिसरी की टिप्पणी

ब्रिटेन ने इस सम्मेलन का आयोजन इसलिए किया ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह से खोलने के उपायों पर चर्चा की जा सके। भारत को भी इस महत्वपूर्ण चर्चा में शामिल होने का निमंत्रण मिला। बैठक के दौरान, विक्रम मिसरी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार के महत्व पर भारत की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।


विदेश मंत्रालय की जानकारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत लगातार ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संपर्क में है, ताकि भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित और निर्बाध मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि एलपीजी, एलएनजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में लगे जहाजों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।


कूटनीतिक प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव

जायसवाल के अनुसार, हाल के कूटनीतिक प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। अब तक छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। भारत इस मुद्दे पर संबंधित देशों के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है, ताकि भविष्य में किसी भी बाधा से बचा जा सके।


ब्रिटेन सम्मेलन में अमेरिका की अनुपस्थिति

इस बीच, ब्रिटेन द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में अमेरिका की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका के शामिल होने की संभावना कम है, जबकि अन्य देश राजनयिक और राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।


होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

यह ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे तनाव के बीच इस जलमार्ग को आंशिक रूप से बाधित किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।


भारत की ऊर्जा जरूरतें

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। अनुमान है कि भारत के कुल तेल आयात का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करता है, जिससे इसकी सुरक्षा भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाती है।