भारत की सुरक्षा के लिए नया आतंकी गठजोड़: हमास, लश्कर और जैश का बढ़ता नजदीकी रिश्ता
भारत की सुरक्षा पर खतरा
नई दिल्ली: दक्षिण एशिया में आतंकवादी संगठनों के बीच बनता नया गठजोड़ भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। पाकिस्तान के संरक्षण में हमास, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बीच बढ़ती नजदीकियां अब स्पष्ट रूप से सामने आ रही हैं। इस उभरते त्रिकोण पर भारतीय खुफिया एजेंसियां गहरी नजर रख रही हैं।
हमास और LeT का नया गठजोड़
सूत्रों के अनुसार, हमास के वरिष्ठ नेता अब पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत-विरोधी एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की कोशिशें तेज हो चुकी हैं। विशेष रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और बांग्लादेश के माध्यम से भारत को घेरने की रणनीति उभरकर सामने आ रही है।
हाल ही में, हमास के नेता नाजी जहीर ने पाकिस्तान मार्कजी मुस्लिम लीग (PMML) की एक बैठक में भाग लिया। PMML, लश्कर-ए-तैयबा का राजनीतिक मोर्चा है, जिसे अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इससे पहले, फरवरी 2025 में, हमास के नेता PoK के रावलाकोट में LeT और JeM के सदस्यों के साथ एक मंच पर दिखाई दिए थे।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह पहली बार था जब हमास ने खुलकर PoK में भारत-विरोधी कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे तीनों संगठनों के बीच बढ़ते तालमेल का संकेत मिला।
ISI की भूमिका
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इस गठजोड़ को बढ़ावा दे रही है। मई 2025 में यह सामने आया था कि हमास ने ISI के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की रणनीति पर काम शुरू किया है। नाजी जहीर को हमास नेता खालिद मशाल का पाकिस्तान में विशेष प्रतिनिधि माना जाता है और वे अक्टूबर 2023 से लगातार सक्रिय हैं।
नया आतंकी नेटवर्क क्यों बन रहा है?
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस गठजोड़ के पीछे परस्पर लाभ की रणनीति है। LeT और JeM हमास से बड़े पैमाने पर हमलों की तकनीक सीखना चाहते हैं, जबकि हमास को पाकिस्तान और कश्मीर जैसे नए क्षेत्रों में अपना नेटवर्क फैलाने का अवसर मिल रहा है।
ISI की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो इन संगठनों को भारत-विरोधी आतंकवाद के लिए मंच और संसाधन उपलब्ध करा रही है।
भारतीय युवाओं का ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण
एक और चिंता का विषय भारत में युवाओं का ऑनलाइन कट्टरपंथ की ओर झुकाव है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान आधारित नेटवर्क सोशल मीडिया और साइबर प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कई मामलों में, ये नेटवर्क खुद को ISIS, खालिस्तानी या संगठित अपराध गिरोह के रूप में पेश कर युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं और भारत में हमले करने के लिए उकसा रहे हैं।
बांग्लादेश का संभावित खतरा
बांग्लादेश में 2024-25 के दौरान राजनीतिक बदलावों के बाद कट्टरपंथी ताकतें फिर से सक्रिय होती दिख रही हैं। ISI वहां जमात-ए-इस्लामी और लश्कर से जुड़े सुप्त नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।
खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों की हालिया बांग्लादेश यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि वहां भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग और हथियारों की आपूर्ति की योजना बन रही है। भारत-बांग्लादेश की लंबी और छिद्रपूर्ण सीमा इसे और खतरनाक बना देती है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
RAW, IB और NIA इस पूरे हमास-LeT-JeM-बांग्लादेश नेक्सस पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। फिलहाल हमास से भारत को सीधा खतरा नहीं बताया जा रहा है, लेकिन उसके जरिए LeT और JeM के मजबूत होने की आशंका है।
साइबर निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि युवाओं को कट्टरपंथ से दूर रखा जा सके। साथ ही अमेरिका जैसे देशों के साथ मिलकर PMML और LeT पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।
भारत के लिए बढ़ती चुनौती
यह नया आतंकी त्रिकोण भारत की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। पाकिस्तान का आतंकवाद को बढ़ावा देना, हमास का इसमें शामिल होना और बांग्लादेश की संभावित भूमिका—ये सभी मिलकर खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में भारत के लिए सतर्कता, साइबर सुरक्षा और कूटनीतिक दबाव तीनों मोर्चों पर मजबूती जरूरी हो गई है।