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भारत के 11 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ऊर्जा आपूर्ति पर नजर

भारत ने हाल ही में 11 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए देखा है, जो अमेरिका और ईरान के बीच हुए सहमति ज्ञापन के बाद संभव हुआ। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज कच्चे तेल और अन्य सामान लेकर आए हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, और ऊर्जा आपूर्ति राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्धारित की जाएगी। जानें इस महत्वपूर्ण विकास के बारे में और क्या है भारत की ऊर्जा नीति।
 

भारत के जहाजों की होर्मुज स्ट्रेट पार करने की जानकारी

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव समाप्त करने के लिए एक सहमति ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर के बाद, भारत के 11 जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को साझा की। शांति समझौते के तहत ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों पर अमेरिकी प्रतिबंध हटने के बाद, भारत ने कहा है कि वह पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर ध्यान दे रहा है और ऊर्जा की आपूर्ति राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्धारित की जाएगी।


फारस की खाड़ी में भारतीय जहाज

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में भारतीय झंडे वाले 10 जहाज फारस की खाड़ी में हैं, और हाल ही में दो और जहाज वहां पहुंचे हैं। 17 जून को एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद से, भारत आने वाले 11 जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं।


कच्चे तेल की मात्रा

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि इन जहाजों में तीन भारतीय झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक में 8,55,000 मीट्रिक से अधिक कच्चा तेल है। इसके अलावा, एक विदेशी झंडे वाला LPG वाहक, एक विदेशी कच्चे तेल का टैंकर और छह भारी मालवाहक जहाज भी हैं, जिनमें खाद लदी हुई है।


भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर नजर

मंत्रालय ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बाकी भारतीय झंडे वाले जहाज भी जल्द ही होर्मुज पार कर सकेंगे। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है।


सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर

ईरानी कच्चे तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध हटाने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे पश्चिम एशिया से जुड़ी सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति के संदर्भ में, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उनकी नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।


भारत के लोगों की प्राथमिकता

विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि 1.4 अरब लोगों को किफायती कीमतों पर और विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा उपलब्ध हो सके। यह उनकी नीति का एक निरंतर हिस्सा रहा है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, मंत्रालय ने कहा कि भारत के फलस्तीन के साथ लंबे समय से अच्छे संबंध हैं और उन्होंने फलस्तीन में कई विकास परियोजनाएं शुरू की हैं।