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भारत के 16 जहाज होर्मुज में फंसे, अमेरिका-ईरान समझौते से उम्मीदें बढ़ीं

भारत के 16 जहाज, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। दिशा नामक भारतीय एलएनजी टैंकर ने पहले ही होर्मुज पार कर लिया है, जिससे अन्य जहाजों को भी राहत मिली है। भारत में उर्वरक की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए, इन जहाजों का सुरक्षित पहुंचना महत्वपूर्ण है। समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिससे स्थिति में और सुधार हो सकता है।
 

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद जहाजों की सुरक्षित वापसी की संभावना


अमेरिका-ईरान समझौता होने के बाद इनके जल्द भारत पहुंचने की उम्मीद


West Asia Crisis (नई दिल्ली) : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत के बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। हालांकि, ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी थी। इसके परिणामस्वरूप, भारत के कई एलपीजी और कच्चे तेल से लदे जहाज सुरक्षित रूप से बाहर निकल गए। लेकिन हाल के दिनों में होर्मुज में स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई थी।


इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने भारत के दो जहाजों पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई। अब, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद, दिशा नामक भारतीय एलएनजी टैंकर ने सुरक्षित रूप से होर्मुज पार किया। यह ऐसा करने वाला पहला भारतीय व्यापारिक जहाज बना, जो 18 जून को गुजरात के दहेज पोर्ट पहुंचेगा।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिशा के सुरक्षित होर्मुज पार करने से उन 34 भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों को उम्मीद मिली है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें से 16 जहाजों पर उर्वरक लदा है, जिसमें 8 यूरिया, 4 डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), 3 सल्फर और 1 अमोनिया का जहाज शामिल है।


भारत में उर्वरक की आवश्यकता

आने वाले दिनों में भारत में उर्वरक की बहुत जरूरत


भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहां धान की रोपाई के लिए उर्वरक की आवश्यकता बढ़ने वाली है। यदि ये सभी जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत पहुंचते हैं, तो इससे न केवल सरकार को, बल्कि किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी।


समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख

19 जून को होने हैं समझौते पर हस्ताक्षर


अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। दोनों देशों ने 15 जून को आपसी समझौते की घोषणा की थी। इसके बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। उन्होंने समझौते की शर्तों पर चर्चा करते हुए उन खबरों को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर देगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है।'